मिड-डे मील में नमक की जगह मिला डिटर्जेंट, 3 रसोइया बर्खास्त; HM भी निलंबित, प्राथमिकी होगी
नालंदा में मिड-डे मील को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। स्कूल में बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन में नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। मामले में कार्रवाई करते हुए तीन रसोइयों को बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि स्कूल के हेडमास्टर को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने स्कूल पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और भोजन की गुणवत्ता तथा रसोई व्यवस्था की जांच की।
मिड-डे मील में डिटर्जेंट मिलने से हड़कंप
स्कूल में बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे मिड-डे मील में नमक की जगह डिटर्जेंट इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई। भोजन तैयार करने की प्रक्रिया में हुई इस गंभीर लापरवाही के बाद स्कूल प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
मामले की जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों ने भोजन और रसोई में रखी सामग्री की जांच की। साथ ही जिम्मेदार कर्मचारियों से पूछताछ की गई।
तीन रसोइयों पर कार्रवाई
जांच के बाद तीन रसोइयों को जिम्मेदार मानते हुए बर्खास्त कर दिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
रसोई में खाद्य सामग्री रखने और भोजन तैयार करने की प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि डिटर्जेंट भोजन की सामग्री के बीच कैसे पहुंचा।
हेडमास्टर निलंबित
मामले में स्कूल के हेडमास्टर के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। उन्हें निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि स्कूल में मिड-डे मील की व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी भी प्रधानाध्यापक की होती है।
जांच के दौरान स्कूल की रसोई व्यवस्था और खाद्य सामग्री की निगरानी में लापरवाही के बिंदुओं को भी देखा जा रहा है।
प्राथमिकी की तैयारी
प्रशासन ने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कही है। जांच के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
मामले के सामने आने के बाद अभिभावकों में भी चिंता है। अब शिक्षा विभाग की जांच में यह स्पष्ट होगा कि डिटर्जेंट भोजन में कैसे पहुंचा और इस लापरवाही के पीछे किसकी जिम्मेदारी थी।