दरभंगा के दो सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर: 2 कमरों में 650-700 छात्र पढ़ने को मजबूर, बारिश में टपकती है छत
बिहार के दरभंगा जिले में सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था की तस्वीर सामने आई है। यहां दो प्लस-टू सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां मात्र दो कमरों में 650 से 700 छात्र पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूलों के भवन भी जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने लगता है, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इन दोनों स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले कक्षाओं की संख्या बेहद कम है। दो कमरों में बड़ी संख्या में छात्रों को पढ़ाना स्कूल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। जगह की कमी के कारण कक्षाओं के संचालन में भी परेशानी होती है और विद्यार्थियों को बैठने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता।स्कूल भवनों की हालत भी चिंता बढ़ाने वाली है। पुरानी और जर्जर इमारतों में कई जगह से छत और दीवारें खराब हो चुकी हैं। बारिश होने पर कमरों के अंदर पानी टपकने लगता है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है और हादसे का खतरा भी बना रहता है।
जानकारी के अनुसार, प्राथमिक और मध्य विद्यालय की कक्षाएं सुबह करीब 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक संचालित होती हैं। इसके बाद माध्यमिक और प्लस-टू कक्षाओं का संचालन किया जाता है। सीमित कमरों के कारण स्कूल प्रबंधन को अलग-अलग कक्षाओं के संचालन के लिए समय और जगह का तालमेल बैठाना पड़ता है।एक ही परिसर में अलग-अलग स्तर की कक्षाएं संचालित होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों को अतिरिक्त परेशानी होती है। खासकर बारिश के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है। जर्जर भवन में पढ़ाई करने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में भी चिंता बनी रहती है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों की मांग है कि स्कूलों में पर्याप्त संख्या में नए कमरे बनाए जाएं और जर्जर भवनों की मरम्मत कराई जाए। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए सिर्फ दो कमरों की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी है। विद्यार्थियों को सुरक्षित और पर्याप्त कक्षाएं मिलें, इसके लिए प्रशासन को जल्द कदम उठाने की आवश्यकता है। फिलहाल दरभंगा के इन दोनों स्कूलों में सीमित संसाधनों के बीच सैकड़ों विद्यार्थी पढ़ाई करने को मजबूर हैं।