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DARBHANGA 25 गांव के लोगों को दो-दो बार बदलनी पड़ रही है नाव

 
बिहार न्यूज़ डेस्क !!! लोगों की आवाजाही करने का एक मात्र सहारा नाव ही बची है। लोग अभी भी पानी के बीच ही जीवन बसर कर रहे हैं। हर साल यहां पर भयंकर बाढ़ आती ही रहती है। बाढ़ से प्रभावित लोगों की दशा इस तरह है कि अपने अपने पालतू पशुओं को लेकर समस्तीपुर, बेगूसराय तथा खगड़िया जिले में पशुओं की चरवाही कर रहे हैं। खबरों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि, कमला बलान पश्चिमी तटबंध से पूरब बसे इटहर, उसरी, सिमटोका तथा तिलकेश्वर पंचायत के लगभग 25 गांवों के निवासी को प्रखंड मुख्यालय आने-जाने के लिए दो-दो बार नाव बदलना पड़ रहा है। जिस कारण नाव का अधिक किराया देना पड़ता है। आखिर लोग करें तो क्या करें। कमला बलान पश्चिमी तटबंध से पश्चिम बसे केवटगामा महिसौत, सुघराईन, कुशेश्वरस्थान उत्तरी, कुशेश्वरस्थान दक्षिणी तथा भिंडुआ पंचायत के 40 गांवों के लोगों को प्रखण्ड मुख्यालय आने जाने के लिए एक जगह नाव पर आवाजाही करनी पड़ रही है।सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि, लोगों की समस्या जस की तस बनी हुई है।बताया जाता है कि इटहर पंचायत के चौकिया, लक्ष्मिनिया, सुघराइन पंचायत के सुघराइन तथा भरैन गांव के 600 परिवार के लोग बाढ़ से विस्थापित होकर कमला बलान पश्चिमी तटबंध पर अपना आशियाना बनाकर धूप और बरसात में किसी तरह अपना जीवन यापन कर रहे हैं।  अदलपुर तथा गौरामडीह सहरबा गांव के 200 बाढ़ से विस्थापित परिवार रेलवे बांध पर रहे हैं। रेलवे बांध पर 200 परिवार के लोग को सामुदायिक किचन के माध्यम से भोजन दिया जा रहा है।