बिहार के अधीक्षण अभियंता की संपत्ति घोषणा में करोड़ों का अंतर, सरकारी दस्तावेज और निगरानी इकाई की FIR के मिलान में खुलासा
बिहार के पथ निर्माण विभाग में पदस्थापित एक अधीक्षण अभियंता की संपत्ति को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। सहरसा अंचल में तैनात अधीक्षण अभियंता विजय कुमार उर्फ विजय कुमार की ओर से दाखिल आधिकारिक संपत्ति घोषणा पत्र और विशेष निगरानी इकाई (SVU) की मूल एफआईआर के बीच करोड़ों रुपये का अंतर सामने आया है। दोनों दस्तावेजों का मिलान करने पर संपत्ति के विवरण में बड़ा अंतर उजागर हुआ है।
जानकारी के अनुसार, विजय कुमार ने 30 जनवरी 2026 को वर्ष 2025-26 के लिए अपना आधिकारिक संपत्ति घोषणा पत्र जमा किया था। इस घोषणा पत्र में उनके नाम पर दर्ज संपत्तियों का विवरण दिया गया था। जब इस दस्तावेज की तुलना विशेष निगरानी इकाई की मूल एफआईआर में दर्ज संपत्ति के विवरण से की गई, तो दोनों के आंकड़ों में बड़ा अंतर पाया गया।
संपत्ति घोषणा पत्र और FIR में अलग-अलग विवरण
अधीक्षण अभियंता की ओर से जमा किए गए संपत्ति घोषणा पत्र में बताई गई संपत्तियों और निगरानी इकाई की एफआईआर में दर्ज संपत्ति के विवरण के बीच अंतर सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। इस तुलना ने सरकारी अधिकारियों की संपत्ति घोषणा की पारदर्शिता और उसकी जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं।
संपत्ति घोषणा पत्र सरकारी अधिकारियों की ओर से अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण देने के लिए जमा किया जाता है। इसका उद्देश्य अधिकारियों की संपत्ति का रिकॉर्ड रखना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी की ओर से घोषित संपत्ति और जांच एजेंसी के दस्तावेजों में दर्ज संपत्ति के बीच बड़ा अंतर मिलता है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन जाता है।
विशेष निगरानी इकाई की FIR बनी अहम दस्तावेज
इस मामले में विशेष निगरानी इकाई की मूल एफआईआर महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जा रही है। आधिकारिक संपत्ति घोषणा पत्र के साथ इसका मिलान किए जाने पर करोड़ों रुपये की खाई सामने आने का दावा किया गया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि संपत्ति घोषणा के दौरान किन संपत्तियों का विवरण दिया गया और किनका उल्लेख नहीं किया गया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में दोनों दस्तावेजों में दर्ज संपत्ति की कुल कीमत, घोषित और अघोषित संपत्तियों का अलग-अलग मूल्य तथा अंतर की सटीक राशि का विवरण नहीं दिया गया है।
जांच और जवाबदेही पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल संपत्ति के वास्तविक मूल्य और आधिकारिक घोषणा के बीच अंतर का है। यदि दस्तावेजों में दर्ज अंतर की पुष्टि होती है, तो संबंधित संपत्तियों के स्रोत और उनके स्वामित्व की जांच अहम हो सकती है।
फिलहाल सामने आई जानकारी के अनुसार, 30 जनवरी 2026 को जमा संपत्ति घोषणा पत्र और विशेष निगरानी इकाई की मूल एफआईआर के तुलनात्मक अध्ययन में करोड़ों रुपये का अंतर उजागर हुआ है। इस मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष और जांच एजेंसी की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।