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Tô Lâm के भारत दौरे के दौरान बिहार की पारंपरिक मिठाइयों और कृषि उत्पादों को विशेष पहचान मिली। Mahabodhi Temple में दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद राष्ट्रपति तो लाम को बिहार की प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाइयां और जीआई-टैग प्राप्त उत्पाद भेंट किए गए। इस दौरान गया का प्रसिद्ध तिलकुट, अनरसा और अन्य स्थानीय उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने रहे।
जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति तो लाम ने बोधगया पहुंचकर महाबोधि मंदिर में भगवान बुद्ध को श्रद्धांजलि अर्पित की। बौद्ध धर्म से जुड़े इस पवित्र स्थल पर उन्होंने कुछ समय ध्यान भी लगाया। उनके स्वागत के लिए बिहार सरकार और स्थानीय प्रशासन ने विशेष तैयारियां की थीं।
दौरे के दौरान बिहार की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को प्रदर्शित करने पर खास जोर दिया गया। राष्ट्रपति को उपहार स्वरूप गया का प्रसिद्ध तिलकुट, पारंपरिक अनरसा और कई कृषि उत्पाद भेंट किए गए। ये उत्पाद अपनी विशेष गुणवत्ता और पारंपरिक पहचान के कारण देशभर में प्रसिद्ध हैं। इनमें कई वस्तुओं को भौगोलिक संकेतक यानी GI टैग भी प्राप्त है।
राजकीय भोज में भी बिहार के पारंपरिक व्यंजनों और मिठाइयों को शामिल किया गया। मेहमानों को स्थानीय स्वाद और संस्कृति से परिचित कराने के उद्देश्य से विशेष मेन्यू तैयार किया गया था। इसमें बिहार की पारंपरिक मिठाइयों के साथ स्थानीय कृषि उत्पादों से बने व्यंजन परोसे गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय दौरे बिहार के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। GI-टैग प्राप्त उत्पादों की प्रस्तुति से राज्य के कारीगरों, किसानों और छोटे व्यापारियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
बोधगया में राष्ट्रपति तो लाम के दौरे को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में विशेष निगरानी रखी गई। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी इस दौरे को देखने के लिए उत्साहित नजर आए।
बिहार सरकार के अधिकारियों ने कहा कि राज्य की संस्कृति, खानपान और पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति तो लाम को भेंट किए गए उत्पाद इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं।
स्थानीय व्यापारियों और मिठाई कारोबारियों ने भी इस अवसर पर खुशी जताई। उनका कहना है कि बिहार की पारंपरिक मिठाइयों को विदेशी मेहमानों तक पहुंचने से राज्य के उत्पादों की लोकप्रियता और बढ़ेगी।
यह दौरा केवल कूटनीतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से भी बिहार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बोधगया में राष्ट्रपति तो लाम की मौजूदगी और बिहार की पारंपरिक मिठाइयों को मिली अहमियत ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती दी है।