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चुकंदर, पालक और फूलों से तैयार हो रहे रंग, इससे होली भी खेलें; हलवा भी बनाकर खाएं

 

होली के त्योहार का पूरे देश में उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बार भागलपुर की महिलाएं होली के रंगों को सिर्फ परंपरा तक ही सीमित नहीं रख रही हैं, बल्कि इसे सेहत और प्रकृति से भी जोड़ रही हैं। महिलाएं केमिकल-फ्री हर्बल गुलाल बना रही हैं। फूलों और ताजी सब्जियों से बना यह खास गुलाल न सिर्फ केमिकल-फ्री है, बल्कि इसमें एरोमाथेरेपी के गुण भी हैं।

इसके प्राकृतिक रंगों की हल्की खुशबू मन को शांत करती है और तनाव कम करती है। घरों और सेल्फ-हेल्प ग्रुप में तैयार होने वाला यह गुलाल महिलाओं की आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है, जहां परंपरा, पर्यावरण सुरक्षा और सेहत के प्रति जागरूकता को मिलाकर एक रंगीन माहौल बनाया जाता है।

यह प्रयोग भागलपुर की मां आनंदी संस्थान कर रही है। इसकी फाउंडर प्रिया सोनी ने बताया, "इस बार हम फूलों और सब्जियों से हर्बल और एरोमाथेरेपी वाला गुलाल तैयार कर रहे हैं, जो आपकी सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। आप इसका हलवा भी बनाकर खा सकते हैं। इस गुलाल की लोगों में काफी डिमांड है।" यह पूरी तरह से केमिकल-फ्री है और प्राकृतिक रूप से बना है।

गुलाब केमिकल-फ्री, इंफेक्शन-फ्री है
जिले में सैकड़ों महिलाएं अलग-अलग सेंटर्स पर गुलाब बनाने का काम कर रही हैं। इस गुलाब से होली खेलने से मेंटल स्ट्रेस दूर होगा और चेहरे के इंफेक्शन से भी बचाव होगा। उन्होंने बताया कि उनका मकसद वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल पर काम करना है। इसलिए, वे मंदिरों के बाहर जमा किए गए फूलों को रीसायकल करके उनसे गुलाब बना रही हैं।

हर्बल गुलाब बनाने में कौन-कौन सी चीजें इस्तेमाल होती हैं?

इस एरोमाथेरेपी हर्बल गुलाब को बनाने में गुलाब, लैवेंडर, चंदन और केवड़े जैसे फूलों की नेचुरल खुशबू का इस्तेमाल किया गया है। यह केमिकल-फ्री गुलाब खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों की स्किन को ध्यान में रखकर बनाया गया है। प्रिया सोनी ने बताया कि इस होली पर एरोमाथेरेपी गुलाब लगाने से आराम और फ्रेशनेस का एहसास होगा।

अगर यह गलती से आपके मुंह में चला भी जाए तो भी यह नुकसान नहीं पहुंचाएगा। आप इसका हलवा बनाकर भी खा सकते हैं। इस पहल का मकसद सिर्फ त्योहारों को सुरक्षित और एनवायरनमेंट-फ्रेंडली बनाना ही नहीं है, बल्कि महिलाओं को रोजगार भी देना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों की महिलाएं इस ऑर्गनाइजेशन से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।