‘चिंकी, चीनी… MOMO इज माय फेवरिट फूड’, पटना में अरुणाचल प्रदेश की डांसर्स का उड़ाया मजाक, मचा बवाल, Video
बिहार की राजधानी पटना में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान पूर्वोत्तर भारत से आई डांस टीम के साथ कथित तौर पर हुए व्यवहार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के बाद यह मामला अब चर्चा और आक्रोश का विषय बन गया है।
यह घटना Patna के एक कार्यक्रम स्थल की बताई जा रही है, जहां पूर्वोत्तर राज्य Arunachal Pradesh से आई महिला नृत्य कलाकारों ने प्रस्तुति दी। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने मंच पर मौजूद कलाकारों का मजाक उड़ाया और उनकी पहचान को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।
वायरल वीडियो में यह दावा किया जा रहा है कि कुछ दर्शकों या आयोजकों की ओर से कलाकारों के लिए “चिंकी”, “चीनी” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया और उनके खान-पान को लेकर भी टिप्पणी की गई। वीडियो में कथित तौर पर यह भी सुना जा सकता है कि “मOMO इज माय फेवरेट फूड” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर कलाकारों का उपहास उड़ाया गया।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। कई यूजर्स ने इसे नस्लीय टिप्पणी बताते हुए कड़ी निंदा की है और कहा है कि भारत जैसे विविधता वाले देश में इस तरह का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि सांस्कृतिक मंचों पर आने वाले कलाकारों के साथ ऐसा व्यवहार कैसे स्वीकार किया जा सकता है।
पूर्वोत्तर भारत के कई सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई है और मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल कलाकारों का अपमान हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की संस्कृति और पहचान को भी ठेस पहुंचाती हैं।
स्थानीय स्तर पर भी यह मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है। पटना में कई सांस्कृतिक और छात्र संगठनों ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि कला और संस्कृति का उद्देश्य लोगों को जोड़ना होता है, न कि किसी की पहचान पर टिप्पणी करना।
फिलहाल आयोजकों की ओर से इस मामले पर स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, पुलिस और प्रशासन ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू करने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी या दुर्व्यवहार की पुष्टि होती है, तो उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं देश की सामाजिक एकता के लिए चिंता का विषय हैं। भारत जैसे बहु-सांस्कृतिक देश में सभी समुदायों और क्षेत्रों के लोगों का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है। सांस्कृतिक मंचों पर इस तरह की घटनाएं न केवल आयोजनों की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द पर भी असर डालती हैं।
इस घटना के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में संवेदनशीलता और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए क्या सख्त दिशानिर्देश होने चाहिए।
फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और सभी की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।