CAG ने PMAY-G में अनियमितताओं पर दी चेतावनी, नाबालिगों और गलत जियो-टैगिंग के मामले सामने
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) ने बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के कार्यान्वयन में गंभीर अनियमितताओं को उजागर किया है। रिपोर्ट में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जो योजना की पारदर्शिता और न्यायसंगत वितरण पर सवाल खड़े करते हैं।
CAG की रिपोर्ट के अनुसार, नाबालिगों को भी पक्के मकान स्वीकृत किए गए, जबकि योजना के नियमों के तहत पात्रता केवल वयस्क परिवारों को ही होनी चाहिए। इसके अलावा, जियो-टैगिंग (Geo-tagging) में भी बड़ी खामियां पाई गईं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि कुछ घरों के जियो-टैगिंग दिल्ली और झारखंड में किए गए थे, जबकि वास्तविक मकान बिहार में स्थित थे।
रिपोर्ट गुरुवार को राज्य विधानसभा में पेश की गई। विधानसभा में इसे सुनते ही विधायकों और सांसदों में चर्चा छा गई। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के उदाहरण के रूप में पेश किया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे तकनीकी और प्रशासनिक सुधार के लिए चेतावनी बताया।
विशेषज्ञों का कहना है कि PMAY-G जैसी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित और पक्का आवास उपलब्ध कराना है। लेकिन इस तरह की अनियमितताएं योजना के मूल उद्देश्यों को कमजोर करती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में ऑनलाइन सत्यापन, डिजिटल निगरानी और कठोर ऑडिटिंग की प्रक्रिया लागू की जानी चाहिए।
CAG रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Bihar में मकानों का निर्माण और वितरण प्रक्रिया में स्थानीय अधिकारियों की जवाबदेही पर प्रश्न उठता है। कई मामलों में लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति और पात्रता की जांच पर्याप्त नहीं की गई।
राज्य विधानसभा में विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला किया। उनका कहना था कि इस तरह की अनियमितताएं गरीब और जरूरतमंद लोगों के अधिकारों पर प्रतिकूल असर डालती हैं। उन्होंने कहा कि कई परिवारों को वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि फर्जी लाभार्थियों को पक्के मकान मिले हैं।
सरकार ने CAG की रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है और कहा कि सभी खामियों को दूर करने के लिए विशेष टीम बनाई जाएगी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि आगामी महीनों में सभी लाभार्थियों के ऑन-साइट सत्यापन और पुनः जियो-टैगिंग की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह रिपोर्ट सिर्फ आलोचना नहीं बल्कि सुधार का अवसर भी प्रदान करती है। अगर राज्य सरकार ने समय रहते सुधार किए, तो योजना का उद्देश्य और प्रभाव दोनों सुधर सकते हैं।
इस रिपोर्ट के प्रकाश में यह स्पष्ट हुआ है कि PMAY-G जैसी राष्ट्रीय योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। Bihar में ग्रामीण विकास के लिए यह अवसर है कि योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुंचे और भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं को रोका जा सके।
इस प्रकार, CAG की रिपोर्ट ने बिहार में PMAY-G के क्रियान्वयन में सुधार की आवश्यकता को उजागर किया है और सरकार को तुरंत कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।