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जाति जनगणना पर कैबिनेट की मुहर, मोदी सरकार के फैसले पर किसने क्या कहा

 

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जाति आधारित जनगणना की घोषणा की है। यह जनगणना मुख्य जनगणना के साथ ही आयोजित की जाएगी। स्वतंत्रता के बाद किसी भी जनगणना प्रक्रिया में जाति को शामिल नहीं किया गया। अब सरकार के इस फैसले के बाद सभी राजनीतिक दल अपने-अपने नफा-नुकसान के हिसाब से प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसको लेकर प्रशांत किशोर ने भी बड़ा बयान दिया है।

'इसमें कोई समस्या नहीं है'
जनगणना में जाति जनगणना को शामिल करने को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा है कि समाज के बारे में बेहतर जानकारी देने वाली किसी भी तरह की जनगणना से कोई दिक्कत नहीं है। सिर्फ जनगणना करने से देश में कोई सुधार नहीं आएगा। सुधार तभी होगा जब सरकार गणना के परिणामों पर कार्रवाई करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में जाति जनगणना रिपोर्ट में कहा गया था कि गरीब परिवारों को रोजगार के लिए दो लाख रुपये दिए जाएंगे, लेकिन उन्हें आज तक नहीं मिले। सिर्फ किताब खरीदने से आप विद्वान नहीं बन जाएंगे, आपको किताब को पढ़ना और समझना भी होगा।