बिहार में जमीन खरीदना होगा सुरक्षित, अब ऑनलाइन जांच के बाद ही मिलेगी रजिस्ट्री की मंजूरी
Bihar में जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब किसी भी व्यक्ति को जमीन खरीदने से पहले सरकारी ऑनलाइन पोर्टल पर 13 प्रकार की जानकारी देनी होगी। इसके बाद संबंधित अंचल अधिकारी (सीओ) 10 दिनों के भीतर दस्तावेजों की जांच कर बताएंगे कि जमीन कानूनी रूप से सही है या उस पर किसी तरह का विवाद, मुकदमा या अन्य कानूनी झंझट मौजूद है।
सरकार की इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े, धोखाधड़ी और विवादित संपत्तियों की बिक्री पर रोक लगाना है। अक्सर देखा जाता है कि लोग बिना पूरी जांच-पड़ताल के जमीन खरीद लेते हैं और बाद में उन्हें कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई मामलों में एक ही जमीन को कई लोगों को बेचने या सरकारी जमीन की अवैध बिक्री जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मामलों में काफी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
नई प्रक्रिया के तहत खरीदार या विक्रेता को ऑनलाइन पोर्टल पर जमीन से संबंधित सभी जरूरी जानकारियां दर्ज करनी होंगी। इनमें खाता संख्या, खेसरा संख्या, जमाबंदी विवरण, जमीन का प्रकार, मालिक का नाम, रकबा, रजिस्ट्री दस्तावेज, आधार से जुड़ी जानकारी और अन्य आवश्यक दस्तावेज शामिल होंगे। आवेदन जमा होने के बाद संबंधित अंचल कार्यालय में इसकी जांच शुरू होगी।
अंचल अधिकारी जमीन के रिकॉर्ड, स्वामित्व, लंबित विवाद, सरकारी अधिग्रहण, बकाया कर और अन्य कानूनी पहलुओं की पड़ताल करेंगे। जांच पूरी होने के बाद सीओ यह स्पष्ट रिपोर्ट जारी करेंगे कि संबंधित जमीन खरीदने योग्य है या नहीं। यदि जमीन पर कोई विवाद या कानूनी अड़चन होगी तो उसकी जानकारी भी आवेदक को दी जाएगी।
राज्य सरकार का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से जमीन खरीदने वाले लोगों का भरोसा बढ़ेगा और रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। साथ ही भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका भी कम होगी। अधिकारियों के अनुसार पहले कई लोग फर्जी कागजात के आधार पर जमीन बेच देते थे, जिससे आम नागरिकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। अब ऑनलाइन सत्यापन और सीओ की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद खरीदार अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में जमीन विवाद लंबे समय से बड़ी समस्या रहे हैं। अदालतों में बड़ी संख्या में भूमि विवाद से जुड़े मामले लंबित हैं। ऐसे में सरकार की यह पहल भविष्य में कानूनी विवाद कम करने में मददगार साबित हो सकती है। डिजिटल रिकॉर्ड और समयबद्ध जांच व्यवस्था से प्रशासनिक जवाबदेही भी बढ़ेगी।
सरकार जल्द ही इस नई प्रणाली को पूरे राज्य में प्रभावी तरीके से लागू करने की तैयारी में जुटी है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिहार में जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और आसान हो जाएगी।