'मन की बात' में गूंजी बिहार की पहल, पीएम मोदी ने सीतामढ़ी के 'वेस्ट टू वेल्थ' मॉडल की सराहना की, पूरे राज्य में होगा विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बिहार के सीतामढ़ी जिले की पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अनूठी पहल की जमकर सराहना की। उन्होंने प्लास्टिक कचरे से बेंच और डेस्क तैयार करने की परियोजना को ‘वेस्ट टू वेल्थ’ का बेहतरीन और प्रेरणादायक उदाहरण बताया। प्रधानमंत्री की इस प्रशंसा के बाद बिहार सरकार ने भी इस मॉडल को पूरे राज्य में लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
प्लास्टिक कचरे से तैयार हो रहे उपयोगी संसाधन
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने कहा कि सीतामढ़ी में प्लास्टिक कचरे को बेकार समझकर फेंका नहीं जा रहा, बल्कि उसे रिसाइकिल कर स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों के लिए मजबूत बेंच और डेस्क जैसी उपयोगी वस्तुओं में बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि कचरे को संसाधन में बदलने की सोच को भी मजबूत करती है।
प्रधानमंत्री ने इस प्रयास को समाज और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी बताते हुए अन्य राज्यों और संस्थाओं से भी ऐसे नवाचारों को अपनाने की अपील की।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया बड़ा ऐलान
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को सुनने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सीतामढ़ी का मॉडल पूरे बिहार के लिए प्रेरणा है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल का विस्तार करेगी, ताकि अन्य जिलों में भी प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर उपयोगी वस्तुएं तैयार की जा सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे स्वच्छता अभियान को मजबूती मिलेगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
स्वच्छता के साथ रोजगार का भी अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) से एक ओर प्रदूषण कम होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय उद्योगों और स्वयं सहायता समूहों के लिए आय के नए स्रोत भी विकसित होंगे। स्कूलों, पंचायत भवनों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर इन उत्पादों का उपयोग बढ़ने से इस मॉडल को आर्थिक मजबूती भी मिलेगी।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण के बीच सीतामढ़ी की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरी है। प्लास्टिक कचरे का सुरक्षित निस्तारण करने के साथ उसे उपयोगी उत्पादों में बदलना सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को भी मजबूत करता है। इससे लैंडफिल में जाने वाले प्लास्टिक कचरे की मात्रा कम होगी और स्वच्छ वातावरण बनाने में मदद मिलेगी।
पूरे बिहार में लागू करने की तैयारी
राज्य सरकार अब इस मॉडल को अन्य जिलों में लागू करने की कार्ययोजना तैयार कर रही है। इसके तहत स्थानीय निकायों, नगर निगमों, पंचायतों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो बिहार न केवल प्लास्टिक कचरा प्रबंधन में नई मिसाल कायम करेगा, बल्कि ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक लागू करने वाले राज्यों में भी शामिल हो सकता है।