बिहार के स्कूलों में लाइब्रेरियन भर्ती पर ब्रेक, छात्रों को बड़ा झटका, पात्रता परीक्षा भी स्थगित
बिहार के सरकारी स्कूलों में लाइब्रेरियन की बहुप्रतीक्षित भर्ती प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लग गई है। राज्य सरकार के इस फैसले से बैचलर ऑफ लाइब्रेरी साइंस (बी-लिब) और मास्टर ऑफ लाइब्रेरी साइंस (एम-लिब) जैसे कोर्स करने वाले हजारों छात्रों को बड़ा झटका लगा है। शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद अब बिहार बोर्ड की ओर से आयोजित की जाने वाली लाइब्रेरियन पात्रता परीक्षा भी नहीं होगी।
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग ने इस संबंध में पहले ही बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए थे। आयोग को बताया गया है कि जब तक नए सिरे से लाइब्रेरियन के पदों का सृजन नहीं हो जाता, तब तक भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाए। इसी कारण पात्रता परीक्षा को भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है।
गौरतलब है कि राज्य के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से लाइब्रेरियन की कमी बनी हुई है। नई शिक्षा नीति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के तहत स्कूलों में पुस्तकालय व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही जाती रही है। इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगना शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
लाइब्रेरी साइंस की पढ़ाई कर रहे छात्र और प्रशिक्षित अभ्यर्थी इस फैसले से बेहद निराश हैं। छात्रों का कहना है कि उन्होंने विशेष रूप से सरकारी स्कूलों में नौकरी की उम्मीद में यह कोर्स किया था। कई छात्रों ने वर्षों की मेहनत और आर्थिक संसाधन लगाकर पढ़ाई पूरी की, लेकिन अब भर्ती प्रक्रिया रुकने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
छात्र संगठनों का आरोप है कि सरकार बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए इस तरह की भर्ती रोककर युवाओं के साथ अन्याय कर रही है। उनका कहना है कि अगर पदों का पुनर्गठन या सृजन किया जाना था, तो भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह रोकने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता था।
वहीं शिक्षा विभाग का पक्ष है कि वर्तमान में लाइब्रेरियन पदों की संख्या, कार्यभार और आवश्यकता को लेकर पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई स्कूलों में पद स्वीकृत नहीं हैं या पहले से तय संरचना के अनुरूप नहीं हैं। ऐसे में नए सिरे से पदों का सृजन जरूरी है, ताकि भर्ती प्रक्रिया कानूनी और प्रशासनिक रूप से मजबूत हो सके।
शिक्षा विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि पद सृजन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही भर्ती और पात्रता परीक्षा को लेकर नई अधिसूचना जारी की जाएगी। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, इसे लेकर कोई स्पष्ट समयसीमा तय नहीं की गई है।
शैक्षणिक विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में लाइब्रेरियन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। पुस्तकालय न सिर्फ छात्रों में पढ़ने की आदत विकसित करता है, बल्कि उनकी बौद्धिक क्षमता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी सहायक होता है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में देरी शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
कुल मिलाकर, बिहार में लाइब्रेरियन भर्ती पर लगी रोक ने एक बार फिर राज्य की नियुक्ति प्रक्रियाओं और रोजगार नीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार कब नए पदों का सृजन कर इस प्रक्रिया को दोबारा शुरू करती है और हजारों प्रशिक्षित युवाओं को राहत मिलती है।