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बिहार पुलिस की एसटीएफ ने माओवादियों के खिलाफ विशेष अभियान तेज किया, उत्तर बिहार नक्सलमुक्त

 

बिहार में माओवादी गतिविधियों को खत्म करने के लिए स्टेट टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने विशेष अभियान तेज कर दिया है। पिछले एक वर्ष में एसटीएफ ने राज्य के विभिन्न हिस्सों से 150 से अधिक माओवादियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कई इनामी नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

अधिकारियों ने बताया कि मुंगेर, लखीसराय और जमुई जैसे माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में एसटीएफ की कार्रवाई के बाद माओवादी धीरे-धीरे झारखंड से सटे इलाकों तक सीमित हो गए हैं। इस सक्रिय अभियान के चलते बिहार में माओवाद की कमर टूट गई है और राज्य का उत्तर बिहार पहले ही नक्सलमुक्त घोषित किया जा चुका है।

एसटीएफ प्रमुख ने कहा, “हमारा उद्देश्य राज्य में सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना है। इस अभियान के दौरान न केवल हथियार और विस्फोटक जब्त किए गए हैं, बल्कि माओवादियों के नेटवर्क को भी काफी हद तक निष्क्रिय किया गया है। बिहार को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाना हमारी प्राथमिकता है।”

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार पुलिस की यह रणनीति नक्सली क्षेत्रों में प्रभावी गुप्त निगरानी, स्थानीय लोगों के सहयोग और सक्रिय अभियान पर आधारित है। इससे माओवादी संगठन का संचालन बाधित हुआ और उनका आतंक कम हुआ।

स्थानीय लोगों ने इस अभियान की सराहना की है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की सक्रियता और एसटीएफ की कार्रवाई के बाद अब ग्रामीण इलाकों में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां सुचारू रूप से चल रही हैं। किसान, व्यापारी और आम नागरिक अब माओवादी खतरे के बिना सुरक्षित जीवन जी सकते हैं।

राज्य सरकार ने भी एसटीएफ की इस सफलता को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि आगामी महीनों में सभी प्रभावित जिलों में सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में नक्सली खतरे को पूरी तरह समाप्त करने के लिए सतत कार्रवाई जारी रहेगी।

बिहार में इस अभियान से यह स्पष्ट हो गया है कि माओवादी समस्या पर सरकार और पुलिस की नीतियां प्रभावी रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सतत निगरानी और सुरक्षा उपायों से बिहार को न केवल स्थायी रूप से नक्सलमुक्त बनाया जा सकता है, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी यह एक मॉडल बन सकता है।