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बिहार में अगले तीन वर्षों में खुलेंगे 42 नए मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की बड़ी घोषणा

 

बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक घोषणा सामने आई है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने जहानाबाद में कहा कि बिहार में अगले तीन वर्षों के भीतर 42 नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य राज्य के हर कोने तक गुणवत्तापूर्ण और सुलभ चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना है, ताकि आम लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों या दूसरे राज्यों की ओर रुख न करना पड़े।

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ने से न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की कमी को भी दूर किया जा सकेगा।

मंत्री ने इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में बिहार के चिकित्सा क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले जहां बिहार को स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में पिछड़ा माना जाता था, आज वही बिहार तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

मंगल पांडेय ने बताया कि नए मेडिकल कॉलेज खुलने से न केवल इलाज की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होंगे। इससे बिहार के छात्रों को डॉक्टर बनने के लिए बाहर जाने की मजबूरी कम होगी और राज्य में ही उच्च गुणवत्ता की मेडिकल शिक्षा उपलब्ध होगी।

इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कूर्मा मेडिकल कॉलेज को लेकर भी अहम जानकारी दी। उन्होंने घोषणा की कि इस मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान भारत योजना के तहत जल्द ही मुफ्त इलाज की सुविधा शुरू की जाएगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी और उन्हें महंगे इलाज की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

मंत्री ने कहा कि आयुष्मान योजना सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके जरिए गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। कूर्मा मेडिकल कॉलेज के आयुष्मान योजना से जुड़ने के बाद आसपास के जिलों के मरीजों को भी लाभ मिलेगा।

कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ अस्पतालों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि इलाज की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करना है। इसके लिए डॉक्टरों की नियुक्ति, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और अस्पताल प्रबंधन में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मंत्री के इस ऐलान का स्वागत किया और इसे बिहार के लिए मील का पत्थर बताया। लोगों का कहना है कि नए मेडिकल कॉलेज खुलने से ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदलेगी।

कुल मिलाकर, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की यह घोषणा बिहार के स्वास्थ्य ढांचे को नई मजबूती देने वाली साबित हो सकती है। अगले तीन वर्षों में 42 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और आयुष्मान योजना के विस्तार से बिहार के लाखों लोगों को बेहतर, सस्ता और सुलभ इलाज मिलने की उम्मीद जगी है।