महिला आरक्षण बिल को लेकर बिहार में सियासत तेज, सीएम सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर साधा निशाना
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे नारी शक्ति के अधिकारों का अपमान और जनता के साथ धोखा बताया है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है।
सीएम सम्राट चौधरी ने आरोप लगाया कि विपक्ष महिला सशक्तिकरण की बात तो करता है, लेकिन वास्तविक रूप से वह नहीं चाहता कि समाज के हर वर्ग की महिलाएं राजनीतिक रूप से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि विपक्ष की सोच सीमित है और वे चाहते हैं कि केवल उनके परिवारों की महिलाएं ही संसद और विधानसभा तक पहुंचें।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यदि यह महिला आरक्षण बिल पूरी तरह लागू हो जाता, तो बिहार विधानसभा में महिलाओं की संख्या 29 से बढ़कर 129 तक पहुंच सकती थी। उनके अनुसार यह एक ऐतिहासिक बदलाव होता, जिससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में व्यापक वृद्धि होती।
उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होती। सीएम ने यह भी कहा कि सरकार इस दिशा में पूरी गंभीरता के साथ काम कर रही है, जबकि विपक्ष लगातार इसमें अड़चन डालने की कोशिश कर रहा है।
सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर यह भी आरोप लगाया कि वह इस महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार को राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से देख रहा है, जो सही नहीं है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे देश की आवश्यकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे इस बिल को लेकर चर्चा बढ़ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज होते जा रहे हैं। महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे अब आने वाले समय में चुनावी राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकते हैं।
फिलहाल, मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विपक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।