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Bihar By Election: बांकीपुर में त्रिकोणीय मुकाबला, बीजेपी के अभिषेक कुमार, RJD की रेखा गुप्ता और जनसुराज के प्रशांत किशोर आमने-सामने

 

बिहार की राजधानी पटना की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। इस सीट पर अब तीन प्रमुख चेहरों के मैदान में उतरने से चुनावी तस्वीर काफी रोचक बन गई है। बीजेपी ने नितिन नवीन के करीबी और कायस्थ समाज से आने वाले अभिषेक कुमार को उम्मीदवार बनाया है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने वैश्य समाज की रेखा कुमारी गुप्ता को टिकट दिया है। दूसरी ओर, जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर भी इस सीट से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।

तीनों प्रमुख दलों की ओर से उम्मीदवारों के चयन के बाद बांकीपुर उपचुनाव में जातीय समीकरण और राजनीतिक रणनीति दोनों अहम भूमिका निभाने वाले हैं। खास बात यह है कि तीनों उम्मीदवार सवर्ण समुदाय से आते हैं, जिससे इस सीट पर मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है।

बीजेपी ने कायस्थ चेहरे पर लगाया दांव

बीजेपी ने बांकीपुर सीट को अपना मजबूत गढ़ बनाए रखने के लिए अभिषेक कुमार पर भरोसा जताया है। अभिषेक कुमार को पूर्व विधायक और बीजेपी नेता नितिन नवीन का करीबी माना जाता है।

बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कायस्थ मतदाताओं की अच्छी संख्या मानी जाती है। ऐसे में बीजेपी ने स्थानीय सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कायस्थ चेहरे को मैदान में उतारा है। पार्टी को उम्मीद है कि पारंपरिक समर्थन के साथ अभिषेक कुमार की व्यक्तिगत पहचान उसे चुनावी फायदा दिला सकती है।

RJD ने वैश्य उम्मीदवार पर खेला दांव

वहीं, आरजेडी ने रेखा कुमारी गुप्ता को उम्मीदवार बनाकर वैश्य समुदाय को साधने की कोशिश की है। बांकीपुर जैसी शहरी सीट पर व्यापारिक समुदाय और मध्यम वर्ग के मतदाता काफी प्रभाव रखते हैं।

आरजेडी की कोशिश होगी कि वह अपने सामाजिक समीकरणों के साथ नए मतदाताओं को जोड़कर बीजेपी के मजबूत किले में सेंध लगा सके। पार्टी स्थानीय मुद्दों को लेकर मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर सकती है।

प्रशांत किशोर की एंट्री से बढ़ा मुकाबला

जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने से बांकीपुर का मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। प्रशांत किशोर लंबे समय से बिहार में राजनीतिक विकल्प खड़ा करने की बात करते रहे हैं।

उनकी कोशिश होगी कि वह पारंपरिक जातीय राजनीति से अलग विकास, रोजगार और सुशासन जैसे मुद्दों को लेकर शहरी मतदाताओं को आकर्षित करें। बांकीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट से चुनाव लड़ना जनसुराज के लिए भी बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है।

सवर्ण वोटों पर सभी की नजर

बांकीपुर विधानसभा सीट पर तीनों प्रमुख उम्मीदवारों के सवर्ण समुदाय से आने के बाद चुनावी रणनीति और भी महत्वपूर्ण हो गई है। अब सभी दलों की नजर सवर्ण वोट बैंक के साथ-साथ युवाओं, महिलाओं और शहरी मतदाताओं पर होगी।

राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सीट पर सिर्फ जातीय समीकरण ही नहीं, बल्कि उम्मीदवारों की छवि, स्थानीय पकड़ और चुनावी मुद्दे भी परिणाम तय कर सकते हैं।

बांकीपुर में दिखेगी हाई-वोल्टेज चुनावी जंग

बीजेपी अपने पुराने गढ़ को बचाने की कोशिश में है, आरजेडी सत्ता विरोधी माहौल का फायदा उठाना चाहेगी और प्रशांत किशोर अपनी नई राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश करेंगे।

ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव बिहार की राजनीति में खासा अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रचार तेज होने के साथ इस सीट पर सियासी गर्मी और बढ़ने की संभावना है।