बिहार विधानसभा में नल जल योजना की खामियों पर चर्चा, ग्रीष्म में पेयजल संकट की आशंका जताई गई
बिहार विधानसभा में हाल ही में नल जल योजना की खामियों और उसकी कार्यप्रणाली पर लगभग 20 मिनट तक चर्चा हुई। इस दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ने योजना की वर्तमान स्थिति और आगामी ग्रीष्म ऋतु में संभावित पेयजल संकट को लेकर चिंता व्यक्त की।
पीएचईडी मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि पंचायतों से हस्तांतरित अधिकांश योजनाएं या तो बंद हैं या आंशिक रूप से ही चालू हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति योजना के सुचारू क्रियान्वयन में बाधा डाल रही है और कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जलापूर्ति में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
विपक्ष के नेताओं ने जोर देकर कहा कि नल जल योजना का उद्देश्य हर घर में सुरक्षित पेयजल पहुंचाना था, लेकिन योजनाओं के बंद या आंशिक रूप से चालू होने के कारण जनता अभी भी भरोसेमंद जलापूर्ति से वंचित है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीष्म ऋतु के दौरान जल संकट और गंभीर हो सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कठिनाइयां बढ़ सकती हैं।
सत्ता पक्ष ने यह तर्क दिया कि हाल की प्रशासनिक और तकनीकी चुनौतियों के कारण कुछ योजनाओं का संचालन प्रभावित हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि कई स्थानों पर पाइपलाइन नेटवर्क और जल स्रोतों की गुणवत्ता की जांच आवश्यक है। इसके अलावा, कर्मचारियों की कमी और उपकरणों की तकनीकी समस्याएं भी संचालन में बाधा डाल रही हैं।
इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने सभी संबंधित विभागों की एक बैठक बुलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि नल जल योजना का गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करना आवश्यक है और राज्य के प्रत्येक क्षेत्र में निरंतर और विश्वसनीय पेयजल आपूर्ति होनी चाहिए। अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जल स्रोतों की नियमित निगरानी करें, योजनाओं का समय-समय पर मूल्यांकन करें और सभी बाधाओं का समाधान करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि नल जल योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। लेकिन योजना के कार्यान्वयन में गुणवत्ता और निगरानी की कमी से यह लक्ष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी तय करने और तकनीकी निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है।
बैठक के दौरान यह भी चर्चा हुई कि ग्रीष्म ऋतु में जल संकट को देखते हुए आपातकालीन जलापूर्ति और वितरण व्यवस्था को मजबूत करना होगा। इसके लिए जलाशयों, टैंकों और पाइपलाइन नेटवर्क की समय पर मरम्मत और रख-रखाव जरूरी है।
अंततः, बिहार विधानसभा में नल जल योजना की कार्यप्रणाली पर हुई यह चर्चा प्रशासन और जनता दोनों के लिए चेतावनी साबित हुई। यह स्पष्ट हुआ कि योजना का प्रभावी और नियमित क्रियान्वयन सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि राज्य के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और निरंतर पेयजल उपलब्ध हो।