भाजपा के अवधेश नारायण सिंह से पहले देवेश चंद्र ठाकुर रहे विधान परिषद के सभापति, लोकसभा चुनाव जीतने के बाद छोड़ा पद
बिहार विधान परिषद के सभापति पद को लेकर राजनीतिक हलकों में एक बार फिर चर्चा तेज है। भाजपा के अवधेश नारायण सिंह से पहले जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के वरिष्ठ नेता देवेश चंद्र ठाकुर करीब दो साल तक विधान परिषद के सभापति रहे। हालांकि, लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता के साथ-साथ सभापति पद से भी इस्तीफा दे दिया था।
करीब दो साल तक संभाली सभापति की जिम्मेदारी
देवेश चंद्र ठाकुर बिहार विधान परिषद के सभापति के तौर पर करीब दो साल तक जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने सदन की कार्यवाही का संचालन किया और विधान परिषद की संवैधानिक एवं संसदीय प्रक्रियाओं के तहत अपनी भूमिका निभाई।
उनका कार्यकाल उस समय खास रहा, जब बिहार की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर लगातार राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल रही थीं। विधान परिषद के सभापति के रूप में उन्होंने सदन के संचालन की जिम्मेदारी निभाई।
लोकसभा चुनाव में जीत के बाद बदली राजनीतिक भूमिका
लोकसभा चुनाव में देवेश चंद्र ठाकुर ने जीत दर्ज की। चुनाव जीतने के बाद उनके सामने विधान परिषद की सदस्यता और सभापति पद छोड़ने की स्थिति बनी। इसके बाद उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और सभापति का पद भी छोड़ दिया।
लोकसभा में पहुंचने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका भी बदल गई। विधान परिषद के सभापति के रूप में सदन का संचालन करने वाले देवेश चंद्र ठाकुर अब राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुए।
अब अवधेश नारायण सिंह संभाल रहे जिम्मेदारी
देवेश चंद्र ठाकुर के बाद बिहार विधान परिषद के सभापति पद की जिम्मेदारी भाजपा के अवधेश नारायण सिंह ने संभाली। इस तरह विधान परिषद के सभापति पद पर सत्ता पक्ष के एक अन्य वरिष्ठ नेता की नियुक्ति हुई।
अवधेश नारायण सिंह के सभापति बनने के संदर्भ में देवेश चंद्र ठाकुर का कार्यकाल भी महत्वपूर्ण माना जाता है। दोनों नेताओं ने अलग-अलग समय में विधान परिषद के सभापति के रूप में सदन की कार्यवाही संचालित की है।
विधान परिषद की राजनीति में अहम पद
बिहार विधान परिषद के सभापति का पद संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण होता है। सभापति सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के साथ-साथ सदस्यों को बोलने का अवसर देने और संसदीय नियमों के पालन की जिम्मेदारी निभाते हैं।
देवेश चंद्र ठाकुर का विधान परिषद से लोकसभा तक का राजनीतिक सफर भी इसी वजह से चर्चा में रहा है। करीब दो साल तक सभापति रहने के बाद लोकसभा चुनाव जीतकर उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता और सभापति पद दोनों छोड़ दिए। इसके बाद अवधेश नारायण सिंह को सभापति की जिम्मेदारी मिली।