पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह पर वार्ता विफल, 25 से 28 जनवरी तक चार दिन बंद रहेंगे बैंक
पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग को लेकर केंद्रीय श्रमायुक्त के समक्ष भारतीय बैंक संघ (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बीच हुई अहम वार्ता विफल हो गई है। वार्ता बेनतीजा रहने के बाद बैंक कर्मचारियों ने अपने आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया है। इसके चलते 25 जनवरी से 28 जनवरी तक लगातार चार दिनों तक बैंक बंद रहने वाले हैं, जिससे देशभर के बैंकिंग उपभोक्ताओं का ध्यान इस ओर गया है।
बैंक यूनियनों के अनुसार, इन चार दिनों में चौथा शनिवार, रविवार, 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) और 27 जनवरी को प्रस्तावित अखिल भारतीय बैंक हड़ताल शामिल है। यानी आम ग्राहकों के लिए बैंक शाखाओं में कामकाज चार दिन तक पूरी तरह प्रभावित रहेगा।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करना, लंबित मुद्दों का समाधान, स्टाफ की कमी दूर करना और कार्यभार कम करना शामिल है। यूनियन का कहना है कि लगातार बढ़ते काम के दबाव और सीमित मानव संसाधन के कारण बैंक कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक तनाव बढ़ रहा है।
यूएफबीयू के मुताबिक, करीब आठ लाख बैंक अधिकारी और कर्मचारी 27 जनवरी को देशव्यापी हड़ताल में हिस्सा लेंगे। इससे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के अधिकांश बैंकों में कामकाज पूरी तरह ठप रहेगा। यूनियन नेताओं ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं, भारतीय बैंक संघ का कहना है कि पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह जैसे फैसलों पर सरकार और नियामक संस्थाओं से व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत है। आईबीए ने वार्ता में कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया, जिसके चलते बातचीत विफल हो गई।
हालांकि, बैंक बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को बहुत अधिक परेशानी होने की संभावना नहीं है, क्योंकि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी। एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और अन्य ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। बैंक अधिकारियों ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे जरूरी लेन-देन पहले ही निपटा लें और डिजिटल माध्यमों का अधिक से अधिक उपयोग करें।
व्यापारियों और छोटे उद्यमियों पर हालांकि इसका कुछ असर पड़ सकता है, खासकर वे लोग जो नकद जमा, चेक क्लियरेंस या शाखा से जुड़े कामों पर निर्भर रहते हैं। कई कारोबारी संगठनों ने सरकार और बैंक यूनियनों से अपील की है कि जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए, ताकि आम जनता को परेशानी न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते चलन के कारण अब बैंक हड़तालों का असर पहले की तुलना में काफी कम हो गया है। बावजूद इसके, ग्रामीण इलाकों और बुजुर्ग ग्राहकों के लिए शाखाओं का बंद रहना अब भी चिंता का विषय है।
कुल मिलाकर, पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह को लेकर आईबीए और यूएफबीयू के बीच सहमति न बनने से बैंकिंग सेक्टर में एक बार फिर टकराव की स्थिति बन गई है। अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर है कि वह इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और बैंक कर्मचारियों की मांगों को लेकर कोई समाधान निकालती है या नहीं।