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बिहार में बाढ़ का पानी उतरते ही बीमारियों का खतरा, गंदगी और मच्छरों से डायरिया-डेंगू समेत कई रोगों की आशंका

 

बिहार में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतरने के बाद अब संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में जमा कीचड़, कचरे और गाद से निकल रही दुर्गंध ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। जगह-जगह जलजमाव और गंदगी के कारण संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है। डायरिया, दस्त, हैजा, टाइफाइड और त्वचा संबंधी रोगों के साथ-साथ डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा भी लोगों को डरा रहा है।

बाढ़ के दौरान बड़ी संख्या में घरों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी जमा हो गया था। पानी उतरने के बाद वहां मोटी परत में कीचड़ और गाद जमा हो गई है। कई स्थानों पर कूड़ा-कचरा भी पड़ा हुआ है। लंबे समय तक पानी में पड़े रहने के कारण जैविक कचरे से दुर्गंध निकल रही है। ऐसे वातावरण में लोगों के लिए साफ-सफाई बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।

बाढ़ के बाद दूषित पानी और भोजन से पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। डायरिया और दस्त के अलावा हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियां भी दूषित पानी या भोजन के माध्यम से फैल सकती हैं। वहीं, लगातार गंदे पानी और कीचड़ के संपर्क में रहने से त्वचा संबंधी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

दूसरी बड़ी चिंता मच्छरों के बढ़ते प्रकोप को लेकर है। जलभराव वाले स्थानों पर मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं। इससे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। शाम होते ही कई बाढ़ प्रभावित इलाकों में मच्छरों की संख्या बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

बाढ़ के बाद सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को हो सकता है, जो पहले से ही राहत शिविरों या भीड़भाड़ वाले स्थानों में रह रहे हैं। साफ पानी, शौचालय और स्वच्छ भोजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने पर संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका रहती है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

ऐसे हालात में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सफाई, कचरा उठाने, कीटनाशक और मच्छररोधी दवाओं के छिड़काव तथा सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था को प्राथमिकता देना जरूरी हो गया है। लोगों को भी दूषित या खुले में रखा पानी और भोजन इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जा रही है। किसी भी तरह के लगातार बुखार, दस्त, उल्टी या त्वचा संबंधी परेशानी होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

बाढ़ से राहत मिलने के बाद अब प्रशासन के सामने प्रभावित इलाकों की सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की चुनौती है। यदि समय रहते जलजमाव और गंदगी को दूर नहीं किया गया तो संक्रामक बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में बाढ़ के बाद की स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय लोगों को मिलकर काम करना होगा।