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चुनाव से पहले हथियार तस्करी तेज, भागलपुर और मुंगेर में सक्रिय गिरोहों पर बढ़ी निगरानी

 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले पूर्वी भारत के कई इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। आशंका जताई जा रही है कि चुनावी माहौल में हिंसा की घटनाओं को अंजाम देने के लिए अवैध हथियारों की मांग बढ़ सकती है। इसी के चलते बिहार के भागलपुर और मुंगेर से हथियारों की तस्करी में तेजी देखी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, इन इलाकों में सक्रिय कुछ स्थानीय अपराधी गिरोह मिनी गन फैक्ट्रियों के जरिए अवैध हथियार तैयार कर रहे हैं और उन्हें विभिन्न स्थानों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इन हथियारों में कट्टा, पिस्तौल और अन्य छोटे हथियार शामिल हैं, जिन्हें आसानी से छिपाकर और ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है।

बताया जा रहा है कि चुनावी समय में राजनीतिक तनाव और प्रतिस्पर्धा के कारण कुछ असामाजिक तत्व इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और अवैध हथियारों की सप्लाई चैन पर नजर रखी जा रही है।

पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने भी इन गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी है। सीमावर्ती इलाकों और संभावित तस्करी मार्गों पर चेकिंग कड़ी कर दी गई है, ताकि किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को रोका जा सके। इसके अलावा, संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की भी जांच की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह की गतिविधियों में बढ़ोतरी चिंता का विषय है, क्योंकि इससे कानून-व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह समय रहते सख्त कदम उठाए और किसी भी तरह की हिंसा की आशंका को टाल सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से इस तरह की अवैध गतिविधियों को लेकर चर्चा जरूर रही है, लेकिन अब इनकी तीव्रता बढ़ती नजर आ रही है। ऐसे में आम जनता भी सतर्क रहने की जरूरत महसूस कर रही है।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भागलपुर और मुंगेर से हो रही हथियार तस्करी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है कि वह इन अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाकर चुनाव को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराए।