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अररिया पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में कोचिंग संचालक को 10 वर्ष की सजा सुनाई

 

बिहार के अररिया जिले से एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। जिले की पॉक्सो कोर्ट ने एक नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म करने के मामले में कोचिंग संचालक अमित कुमार अमन को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 90 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने आदेश में शिक्षा के नाम पर किए गए अपराध को बर्दाश्त न करने का स्पष्ट संदेश दिया है।

मामले की जानकारी के अनुसार, आरोपी अमित कुमार अमन जिले के एक कोचिंग संस्थान का संचालक है। उसने नाबालिग छात्रा का शोषण किया था, जिससे पीड़िता और उसके परिवार पर गहरा असर पड़ा। इस मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और आरोपी को गिरफ्तार किया। इसके बाद मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में सुनवाई शुरू की गई।

अदालत में पेश सबूतों और गवाहों की गवाही के आधार पर यह तय किया गया कि आरोपी ने छात्रा के साथ यौन शोषण किया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे अपराध समाज और बच्चों के लिए गंभीर खतरा हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह शिक्षक या कोचिंग संचालक हो, बच्चों के साथ शोषण नहीं कर सकता और इसके लिए कड़ी सजा निश्चित है।

अदालत ने 10 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 90 हजार रुपये के जुर्माने की भी व्यवस्था की है। जुर्माने की राशि राज्य कोष में जमा होगी और इसके माध्यम से पीड़िता को न्यायोचित मुआवजा भी मिल सकेगा। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि आरोपी जुर्माने की राशि जमा नहीं करता है तो अतिरिक्त कारावास की सजा भी भुगतना होगा।

अररिया जिले में यह फैसला शिक्षा के नाम पर किए जाने वाले अपराधों के खिलाफ एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है। न्याय विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो कोर्ट द्वारा सख्त फैसला बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

स्थानीय लोगों और नागरिक समाज ने भी कोर्ट के इस फैसले की सराहना की है। उनका कहना है कि ऐसे निर्णय से अपराधियों में भय पैदा होगा और बच्चों के साथ यौन शोषण की घटनाओं में कमी आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अभिभावकों और स्कूल/कोचिंग संस्थानों को बच्चों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के खिलाफ अपराधों में समय पर और कड़ा कानूनी कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है। पॉक्सो एक्ट और अन्य कानूनों का सख्ती से पालन कर बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। इस फैसले से यह संदेश गया है कि शिक्षा का क्षेत्र सुरक्षित और अपराध मुक्त होना चाहिए।

इस प्रकार, अररिया पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में सख्त फैसला सुनाकर शिक्षा के नाम पर अपराध करने वालों के खिलाफ कानून की सख्त कार्रवाई का उदाहरण पेश किया है। यह मामला बच्चों की सुरक्षा और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।