सत्ता से ऊपर राष्ट्रभक्ति और दान की मिसाल
दरभंगा राज ने सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि संवेदना, दान और राष्ट्रभक्ति के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह ने अपने पूरे जीवन को शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रहित के लिए समर्पित किया। उनका जीवन केवल राजसत्ता के भव्यता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने देश और समाज के लिए कई अहम योगदान दिए।
द्वितीय विश्व युद्ध के समय महाराजाधिराज ने अपने संसाधनों से विमान दान किए, जिससे भारत के सैन्य और औद्योगिक प्रयासों को मजबूती मिली। इसके अलावा, 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान उनके निधन के बाद, उनके द्वारा स्थापित ट्रस्ट ने देश को 600 किलो सोना और हवाई पट्टियां समर्पित कर दी।
इतिहासकारों का मानना है कि यह दानशीलता और राष्ट्रभक्ति की मिसाल इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। यह केवल भौतिक योगदान नहीं था, बल्कि यह उस समय के सामाजिक और राष्ट्रीय संदर्भ में दरभंगा राज परिवार की अटूट निष्ठा और देशभक्ति को प्रदर्शित करता है।
कामेश्वर सिंह ने शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में भी अपार योगदान दिया। उन्होंने दरभंगा और आसपास के क्षेत्रों में शैक्षणिक संस्थान स्थापित किए और कला-संस्कृति के संरक्षण को प्राथमिकता दी। उनके प्रयासों ने समाज के कमजोर वर्गों तक शिक्षा और विकास की रोशनी पहुँचाई।
दरभंगा राज का यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि राजसत्ता केवल सत्ता में रहने का नाम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की भलाई के लिए जिम्मेदारी का प्रतीक भी है। उनके जीवन और योगदान से यह स्पष्ट होता है कि सच्ची महानता केवल वैभव में नहीं, बल्कि दूरदर्शिता, समाज सेवा और राष्ट्रभक्ति में निहित होती है।
महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह और दरभंगा राज परिवार की यह विरासत आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह याद दिलाती है कि देश और समाज के प्रति सच्ची निष्ठा और दानशीलता ही इतिहास में अमर हो जाती है।