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बिहार में बाढ़ के बीच शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, 13 जिलों के 5 हजार स्कूल डूबे; बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल

 

बिहार इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में है। गंगा, कोसी और गंडक समेत कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। पटना, मुंगेर और भागलपुर समेत राज्य के 13 जिलों में बाढ़ का असर बेहद गंभीर है। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब 5 हजार स्कूल बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब चुके हैं। इसके बावजूद शिक्षा विभाग की ओर से लिया गया एक फैसला अब सवालों के घेरे में है। बाढ़ की इस भयावह स्थिति के बीच विभाग के फैसले को लेकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

बाढ़ के कारण कई गांवों और शहरों के निचले इलाकों में पानी भर गया है। सड़कों और संपर्क मार्गों पर भी पानी जमा है। कई जगह लोगों को जरूरी काम के लिए भी पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। ऐसे में स्कूलों तक पहुंचना बच्चों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

13 जिलों में स्कूल पानी में डूबे

बाढ़ प्रभावित जिलों में बड़ी संख्या में सरकारी और निजी स्कूल प्रभावित हुए हैं। कई विद्यालय परिसरों में घुटनों से लेकर कमर तक पानी जमा होने की स्थिति बताई जा रही है। कुछ स्कूल पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। इससे पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ स्कूल भवनों और शैक्षणिक संसाधनों को भी नुकसान का खतरा है।ऐसे समय में सबसे बड़ा सवाल बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। जलजमाव वाले इलाकों में जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा रहता है। इसके अलावा तेज बहाव वाले पानी में बच्चों के फिसलने या डूबने की आशंका भी बनी रहती है।

अभिभावकों की चिंता बढ़ी

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि जब स्कूल परिसर और आसपास के स्ते पानी में डूबे हैं, तो बच्चों को वहां भेजना सुरक्षित नहीं है। अभिभावक चाहते हैं कि प्रशासन पहले जमीनी हालात का आकलन करे और उसके बाद स्कूल संचालन को लेकर फैसला लिया जाए।स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ के दौरान प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा होनी चाहिए। जिन इलाकों में आवागमन मुश्किल है, वहां स्कूलों को लेकर अलग व्यवस्था की जरूरत है।

राहत और पढ़ाई के बीच संतुलन की चुनौती

बिहार में हर साल मानसून के दौरान कई जिले बाढ़ से भावित होते हैं। इस दौरान स्कूलों को भी नुकसान पहुंचता है और बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। इस बार भी हजारों स्कूलों के प्रभावित होने से शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।एक तरफ बाढ़ प्रभावित परिवार राहत और सुरक्षित स्थान की तलाश में हैं, वहीं दूसरी ओर बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की चुनौती है। ऐसे में शिक्षा विभाग के सामने यह तय करना जरूरी है कि पढ़ाई जारी रखने और बच्चों की सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।फिलहाल बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रभावित जिलों में प्रशासन और शिक्षा विभाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। 5 हजार स्कूलों के जलमग्न होने की स्थिति में बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब अब विभाग के फैसलों और जमीनी कार्रवाई से ही मिलेगा।