मोतिहारी में यूरिया की कालाबाजारी का आरोप, बंजरिया का लक्ष्मण चौक बना खाद माफियाओं का ठिकाना
मोतिहारी में यूरिया खाद की कथित कालाबाजारी का मामला एक बार फिर सामने आया है। बंजरिया प्रखंड क्षेत्र में खाद की अवैध बिक्री को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि खाद माफिया किसानों की जरूरत का फायदा उठाकर यूरिया की मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। मामला बंजरिया थाना क्षेत्र के लक्ष्मण चौक का बताया जा रहा है।
किसानों के लिए यूरिया बेहद महत्वपूर्ण खाद है। खासकर फसलों की जरूरत के समय इसकी मांग अचानक बढ़ जाती है। ऐसे में यदि बाजार में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार खाद उपलब्ध नहीं हो तो किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ लोग यूरिया की कालाबाजारी कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि बंजरिया प्रखंड में लंबे समय से खाद की अवैध बिक्री को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। लक्ष्मण चौक के आसपास भी यूरिया की कथित कालाबाजारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि खाद को निर्धारित प्रक्रिया से अलग तरीके से बेचकर किसानों से अधिक रकम ली जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मामले में कृषि विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि खाद की कथित कालाबाजारी का यह खेल विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत या सहयोग के बिना लंबे समय तक चलना मुश्किल है। हालांकि अधिकारियों पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह किसानों के हितों के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा।
यूरिया की कालाबाजारी से सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और सीमांत किसानों को उठाना पड़ता है। किसान पहले से ही खेती की लागत बढ़ने से परेशान हैं। ऐसे में निर्धारित कीमत से अधिक रकम देकर खाद खरीदने की स्थिति में उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ जाती है। कई बार खाद की उपलब्धता को लेकर भी किसानों को दुकानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
लक्ष्मण चौक से सामने आए इस मामले ने एक बार फिर खाद वितरण व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों और स्थानीय लोगों की मांग है कि कृषि विभाग और प्रशासन की टीम पूरे मामले की जांच करे। खाद की उपलब्धता, स्टॉक, बिक्री रजिस्टर और निर्धारित कीमत पर बिक्री की जांच होने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल मामला लगाए गए आरोपों के स्तर पर है। यूरिया की कालाबाजारी और कृषि विभाग के अधिकारियों की कथित भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन की ओर से यदि जांच या कार्रवाई की जाती है तो उसके बाद पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।