शंकराचार्य Avimukteshwaranand Saraswati पर POCSO आरोप के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यौन उत्पीड़न और बच्चों से यौन शोषण के आरोपों के मद्देनज़र इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत (anticipatory bail) के लिए याचिका दायर की है। यह याचिका प्रारंभिक गिरफ्तारी से सुरक्षा के उद्देश्य से दायर की गई है और जल्द ही कोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है।
🧑⚖️ मामले की पृष्ठभूमि
प्रयागराज के झूंसी थाना में दर्ज FIR में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुखुंदानंद गिरि के खिलाफ POCSO (Protection of Children from Sexual Offences Act) और भारतीय Nyaya संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता में आशुतोष ब्रह्मचारी और दो अन्य शामिल हैं — जिनमें से एक नाबालिग बताया गया है — जिन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें एक वर्ष से अधिक समय तक धार्मिक आयोजनों और गुरुकुल के दौरान शारीरिक रूप से शोषित किया गया।
🚨 एफआईआर दर्ज होने का आदेश
एक विशेष POCSO अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश पुलिस को दिया था, जिसके तहत मामला झूंसी पुलिस स्टेशन में आधिकारिक रूप से दर्ज किया गया। इसके बाद अभियुक्त पर गिरफ्तारी की संभावनाओं के मद्देनज़र अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
📜 क्या कहा गया याचिका में?
अग्रिम जमानत याचिका को वरिष्ठ अधिवक्ताओं — राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश — के माध्यम से दायर किया गया है। याचिका दाखिल होने से पहले अग्रिम जमानत की प्रति शासकीय अधिवक्ता के कार्यालय को सौंपी गई है। अब यह मामला कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
📍 अभियुक्त का रुख
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मीडिया से कहा है कि वे निरपराध हैं और आरोपों को साजिश करार दिया है। वे यह भी दावा कर रहे हैं कि पुलिस ने FIR दर्ज करने में देरी की और केवल अदालत के आदेश पर कार्य किया, जबकि उन्हें यह नहीं बताया गया कि पुलिस की ओर से उनसे संपर्क किया गया।
👮 पुलिस जांच जारी
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपों, गवाहों व सबूतों की समीक्षा कर रही है। अदालत द्वारा अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के बाद आगे की प्रक्रिया जारी होगी।
⚖️ यह मामला वरिष्ठ धार्मिक पदाधिकारी के संदर्भ में है, इसलिए न सिर्फ कानूनी रूप से बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी ध्यान खींच रहा है। अदालत की अगली सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई और शीर्ष अदालत की मजबूती की दिशा स्पष्ट होगी।