AIIMS-PMCH के MBBS छात्र बने फर्जी परीक्षार्थी, वीडियो में देंखे 40 लाख में डॉक्टर बनाने का खुलासा
बिहार के लखीसराय में आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि AIIMS, PMCH और गया मेडिकल कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में MBBS की पढ़ाई कर रहे छात्र कथित तौर पर फर्जी परीक्षार्थी बनकर परीक्षा देने पहुंचे थे। पुलिस ने तीन परीक्षा केंद्रों से कुल 9 फर्जी परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया है।
40 लाख रुपये में डॉक्टर बनाने का ठेका
प्रारंभिक जांच के अनुसार, जालसाजों का यह गिरोह अभ्यर्थियों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए मोटी रकम वसूलता था। बताया जा रहा है कि एक उम्मीदवार को डॉक्टर बनाने के नाम पर करीब 40 लाख रुपये तक का सौदा किया जाता था। गिरोह का तरीका असली परीक्षार्थियों की जगह मेधावी छात्रों को परीक्षा में बैठाना था, ताकि अच्छे अंक हासिल कर प्रवेश सुनिश्चित किया जा सके।
PMCH का छात्र निकला मास्टरमाइंड
पुलिस जांच में इस पूरे नेटवर्क का मुख्य किरदार Patna Medical College and Hospital का एक MBBS छात्र सामने आया है। गिरफ्तारी के समय उसने अपना नाम मयंक कश्यप बताया था, लेकिन जांच में उसकी पहचान अश्विनी कुमार के रूप में हुई। जानकारी के अनुसार, अश्विनी कुमार PMCH के 2022 बैच का थर्ड ईयर MBBS छात्र है।
बायोमेट्रिक कर्मचारी बनकर पहुंचा परीक्षा केंद्र
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी बायोमेट्रिक कर्मचारी के वेश में परीक्षा केंद्र के अंदर दाखिल हुआ था। वह केंद्र के भीतर बैठकर परीक्षार्थियों की मदद कर रहा था और पूरी प्रक्रिया पर नजर रखे हुए था।पुलिस को जांच के दौरान यह भी पता चला कि उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए मयंक कश्यप नाम से सिम कार्ड ले रखा था।
तीन केंद्रों से पकड़े गए 9 फर्जी परीक्षार्थी
गिरोह की पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लखीसराय के तीन अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से एक साथ 9 फर्जी परीक्षार्थियों को पकड़ा गया। इनमें कई ऐसे छात्र शामिल बताए जा रहे हैं जो देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में अध्ययनरत हैं।
नेटवर्क के बड़े होने की आशंका
पुलिस का मानना है कि यह केवल स्थानीय स्तर का मामला नहीं है, बल्कि इसके तार दूसरे राज्यों और मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े बड़े नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों और कॉल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस खुलासे ने मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा केंद्रों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला देश के सबसे बड़े परीक्षा फर्जीवाड़ों में से एक बन सकता है। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क के जरिए अब तक कितने अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया गया।