विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद अलर्ट मोड में विभाग, इजराइली विशेषज्ञों की मदद से होगी पुलों की निगरानी
विक्रमशिला सेतु का एक स्पैन नदी में गिरने और राज्य के कई पुलों में दरारें मिलने की घटनाओं के बाद अब पुलों की सुरक्षा को लेकर विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। राज्य सरकार और संबंधित विभाग ने पुलों की लगातार निगरानी और तकनीकी जांच के लिए विशेष व्यवस्था शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, हाल के दिनों में कई पुलों की संरचना में कमजोरी और दरारें सामने आने के बाद अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया है। खासतौर पर विक्रमशिला सेतु से जुड़ी घटना ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इसके बाद राज्यभर के बड़े और पुराने पुलों का सर्वे कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, पुलों की मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी कड़ी में इजराइल के विशेषज्ञों के साथ एक अहम बैठक भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जा चुकी है। इस बैठक में पुलों की स्थिति पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और हाईटेक सेंसर तकनीक पर चर्चा हुई।
अधिकारियों का कहना है कि नई तकनीक के जरिए पुलों में आने वाली सूक्ष्म दरारों, कंपन और संरचनात्मक बदलावों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा। इससे किसी बड़े हादसे की आशंका को पहले ही टाला जा सकेगा। विभाग अब ऐसे पुलों की सूची तैयार कर रहा है, जो काफी पुराने हैं या जहां भारी यातायात का दबाव ज्यादा है।
बताया जा रहा है कि सैटेलाइट मॉनिटरिंग तकनीक के माध्यम से पुलों की नियमित रिपोर्ट तैयार होगी। इसमें पुल की मजबूती, झुकाव, दरार और अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी रियल टाइम में मिल सकेगी। इसके अलावा ड्रोन सर्वे और डिजिटल मैपिंग का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों ने कहा कि राज्य में मौजूद महत्वपूर्ण पुलों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। किसी भी तरह की लापरवाही से बचने के लिए इंजीनियरों और तकनीकी टीमों को अलर्ट मोड में रखा गया है। जरूरत पड़ने पर कमजोर पुलों पर भारी वाहनों की आवाजाही सीमित करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर तकनीकी जांच और आधुनिक निगरानी व्यवस्था से पुल हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। फिलहाल विभाग राज्य के सभी प्रमुख पुलों का डाटा तैयार कर उनकी स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन कर रहा है।