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बक्सर के सरकारी स्कूल में छात्राओं के यौन शोषण का आरोप, दो शिक्षकों पर POCSO केस; हेडमास्टर गिरफ्तार

 

 बिहार के बक्सर जिले के एक सरकारी स्कूल में छात्राओं के कथित यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल के दो शिक्षकों ने छात्राओं के आपत्तिजनक वीडियो बनाए और उनका यौन शोषण किया। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामले में पुलिस ने स्कूल के हेडमास्टर को भी गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि घटना की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने कथित तौर पर मामले को दबाने की कोशिश की। हेडमास्टर की गिरफ्तारी की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब एक दिन पहले ही उनका चयन राजकीय पुरस्कार के लिए किया गया था।

दो शिक्षकों पर गंभीर आरोप

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, स्कूल के दो शिक्षकों पर नाबालिग छात्राओं के कथित यौन शोषण और उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाए जाने के आरोप हैं। मामला सामने आने के बाद स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग में भी हलचल बढ़ गई।

पुलिस ने नाबालिगों से जुड़े इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। जांच टीम अब आरोपों से संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों को जुटाने में लगी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित घटनाएं कब और किन परिस्थितियों में हुईं।

मामला दबाने के आरोप में हेडमास्टर गिरफ्तार

पुलिस ने स्कूल के हेडमास्टर को भी गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि उन्हें मामले की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हेडमास्टर को घटना की जानकारी कब हुई और उसके बाद उन्होंने क्या कदम उठाए। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या मामले को दबाने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी।

गिरफ्तारी से एक दिन पहले पुरस्कार के लिए चयन

मामले में हेडमास्टर से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी से ठीक एक दिन पहले ही उनका चयन राजकीय पुरस्कार के लिए किया गया था।

हेडमास्टर के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आने और गिरफ्तारी के बाद अब पुरस्कार चयन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यह भी जांच का विषय है कि चयन के समय उनके खिलाफ किसी शिकायत या मामले की जानकारी संबंधित विभाग के पास थी या नहीं।

नाबालिग छात्राओं की पहचान गोपनीय

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। नाबालिग छात्राओं से जुड़ा मामला होने के कारण उनकी पहचान को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। कानून के तहत यौन अपराधों के पीड़ित बच्चों की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य है।

पुलिस आरोपों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है। साथ ही दोनों शिक्षकों और हेडमास्टर की भूमिका को अलग-अलग तरीके से जांचा जा रहा है।

फिलहाल पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।