शाहजहांपुर में 92 मस्जिदें तिरपाल से ढकीं, जानें पूरा कारण
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में आगामी होली उत्सव के मद्देनजर प्रशासन ने जुलूस मार्ग पर आने वाली लगभग 92 मस्जिदों व मजारों को तिरपाल (टारपॉलिन) से ढक दिया है। यह कदम शांति एवं साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए उठाया गया है, ताकि पारंपरिक जूलूस के दौरान कहीं भी कोई अप्रिय घटना न हो।
🎉 क्या है ‘लाट साहब’ जूतामार होली?
शाहजहांपुर में होली केवल रंग‑गुलाल का त्योहार नहीं है, बल्कि यहाँ की ‘लाट साहब’ जूतामार होली एक ऐतिहासिक और अनूठी परंपरा है। इस दौरान एक व्यक्ति को ब्रिटिश शासन के प्रतीक ‘लाट साहब’ के रूप में भैंसा गाड़ी पर बैठाया जाता है, और लोग उस पर रंग, जूते‑चप्पल व झाड़ू फेंकते हैं — यह प्रतीकात्मक रूप से पुराने समय के अत्याचार के विरोध का रूप है।
इस जुलूस की वजह से प्रशासन ने होली से करीब आठ दिन पहले ही सुरक्षा तैयारियाँ शुरू कर दी हैं और जुलूस के मार्ग में पड़ने वाली सभी धार्मिक स्थलों को तिरपाल से ढक दिया है।
🛡️ तिरपाल क्यों लगाया गया? प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि यह कदम शांति बनाए रखने और सामाजिक भावनाओं का सम्मान करने के लिए उठाया गया है।
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होली के अवसर पर जहां लोगों द्वारा रंग‑गुलाल फेंका जाता है, वहीं कहीं भी मस्जिदों पर रंग लागने से विवाद उत्पन्न हो सकता है।
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इसलिए इन मस्जिदों को तिरपाल से ढक कर संवेदनशील स्थलों को सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
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साथ ही पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और ड्रोन निगरानी जैसे अन्य सुरक्षा प्रबंध भी लागू किए जा रहे हैं।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह एक सामुदायिक सौहार्द बनाए रखने वाला प्रबंध है, न कि किसी धार्मिक स्थान के खिलाफ कोई कार्रवाई।
🚓 सुरक्षा इंतज़ाम और तैयारियाँ
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि
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जुलूस मार्ग के आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया जाएगा,
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बॉडी कैमरा और CCTV निगरानी जैसे तकनीकी साधनों से कार्यक्रम को रिकॉर्ड किया जाएगा,
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विभिन्न मार्गों पर बैरिकेडिंग भी स्थापित की गई है ताकि भीड़ नियंत्रण सुनिश्चित हो सके।
इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य होली उत्सव को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाना है।
🧘 समुदाय के प्रति प्रशासन की भावना
शाहजहांपुर की यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और शहर इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानता है। प्रशासन ने कहा है कि तिरपाल से मस्जिदों को ढकना किसी समस्या या विवाद की आशंका के चलते किया गया है, ताकि सभी समुदायों की श्रद्धा और भावना का सम्मान हो सके।
इस तरह के कदम से यह संकेत मिलता है कि त्योहारों के दौरान सुरक्षा और सौहार्द दोनों को प्राथमिकता दी जा रही है तथा विवादों से बचकर शांतिपूर्ण माहौल को सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।