बिहार में 90 लाख जमाबंदियों की होगी जांच, नाम से लेकर खाता-खेसरा तक की गलतियां होंगी दुरुस्त
बिहार में करीब 90 लाख जमाबंदियों को दुरुस्त करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। रैयत का नाम, पिता का नाम, खाता-खेसरा, रकबा और लगान समेत अन्य गलत विवरणों को मूल अभिलेख से मिलान कर ठीक किया जाएगा।
बिहार में जमीन के रिकॉर्ड को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा अभियान शुरू किया है। इसके तहत राज्य की करीब 90 लाख जमाबंदियों की जांच कर उनमें मौजूद त्रुटियों को दूर किया जाएगा। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्ताओं और बंदोबस्त पदाधिकारियों को अभियान को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को जमाबंदी के डिजिटल रिकॉर्ड का मूल अभिलेख से मिलान करने और गलत प्रविष्टियों को दुरुस्त करने को कहा गया है।
मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि जमाबंदी में रैयत का नाम, पिता का नाम, खाता, खेसरा, रकबा, लगान या अन्य कोई विवरण मूल अभिलेख से अलग पाया जाता है तो उसे ठीक किया जाए। इसके अलावा शून्य रकबा, शून्य लगान और जिन स्थानों पर जरूरी जानकारी दर्ज नहीं है, उन्हें भी अभियान के दौरान दुरुस्त किया जाएगा। इसका उद्देश्य जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है।
15 सितंबर से शुरू हुआ अभियान
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से यह विशेष अभियान 15 सितंबर से शुरू किया गया है और 31 अक्टूबर तक चलने की जानकारी सामने आई है। अभियान के दौरान डिजिटाइज्ड जमाबंदी में दर्ज विवरणों की जांच की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि रिकॉर्ड में किसी भी तरह की गलती मिलने पर उसे संबंधित मूल दस्तावेजों के आधार पर सुधारा जाए।
जमीन मालिकों के लिए क्यों जरूरी है सुधार
जमाबंदी में नाम, खाता, खेसरा या रकबा गलत दर्ज होने से जमीन मालिकों को भविष्य में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जमीन की खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज, निबंधन और अन्य राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं में रिकॉर्ड का सही होना जरूरी है। रिकॉर्ड में गलती रहने पर जमीन से जुड़े विवाद की स्थिति भी पैदा हो सकती है। इसलिए अभियान के दौरान पुराने रिकॉर्ड और ऑनलाइन जमाबंदी के बीच अंतर को दूर करने पर जोर दिया जा रहा है।
पहले भी उपलब्ध कराई गई है ऑनलाइन सुधार की सुविधा
बिहार सरकार की ओर से जमाबंदी में त्रुटियों को ठीक करने के लिए परिमार्जन प्लस जैसी ऑनलाइन व्यवस्था पहले से उपलब्ध है। इसके माध्यम से नाम, पिता का नाम, खाता, खेसरा, रकबा, चौहद्दी और लगान से जुड़ी गलतियों में सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है। आवेदन की जांच राजस्व स्तर पर की जाती है और जरूरी दस्तावेजों के आधार पर सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
अधिकारियों की जिम्मेदारी तय
अभियान के तहत राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को जमाबंदी सुधार की जिम्मेदारी दी गई है। वरिष्ठ अधिकारी इसकी नियमित निगरानी करेंगे। सरकार का लक्ष्य भू-अभिलेखों को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी भविष्य की परेशानियों को कम किया जा सके।
इस अभियान के दौरान जमीन मालिकों को भी अपनी जमाबंदी की जानकारी जांचने की जरूरत है। यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड में मूल दस्तावेज से कोई अंतर दिखाई देता है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है।