लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में खामियों पर PNC इंफ्राटेक पर 3 साल का बैन, बिहार में भी कंपनी के प्रोजेक्ट पर नजर
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में सामने आई खामियों और सड़क के कुछ हिस्सों में धंसने के मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने PNC इंफ्राटेक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। NHAI ने कंपनी को तीन साल के लिए अपने नए प्रोजेक्ट्स की बोली प्रक्रिया से प्रतिबंधित कर दिया है। कंपनी को लेकर यह कार्रवाई 11 सितंबर को जारी आदेश के बाद सामने आई।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन जुलाई 2026 में हुआ था। इसके कुछ ही समय बाद एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में सड़क की सतह खराब होने और धंसने की शिकायतें सामने आईं। 26 जुलाई को एक्सप्रेसवे के करीब 300 मीटर हिस्से में स्लिपेज भी सामने आया था। इसके बाद NHAI ने तकनीकी जांच शुरू कराई और प्रभावित हिस्से की मरम्मत के निर्देश दिए।
NHAI ने अगस्त में PNC इंफ्राटेक को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। कंपनी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। इसके बाद कार्रवाई आगे बढ़ी और सितंबर में तीन साल के डिबारमेंट का फैसला सामने आया। प्रतिबंध के दौरान कंपनी NHAI, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और उनकी संबंधित एजेंसियों के नए प्रोजेक्ट्स के लिए बोली नहीं लगा सकेगी।
खास बात यह है कि PNC इंफ्राटेक की बिहार में भी सड़क परियोजनाओं से जुड़ी मौजूदगी रही है। कंपनी के आधिकारिक निवेश दस्तावेज के अनुसार, बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (BSRDC) से हथौरी-अतर-बवंगामा-औराई रोड पर हाई लेवल ब्रिज और एप्रोच रोड के निर्माण का करीब 420 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मिला था। इसके अलावा कंपनी के निवेश दस्तावेजों में बिहार में वाराणसी-रांची-कोलकाता हाईवे के अलग-अलग पैकेजों का भी उल्लेख है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार NHAI का यह तीन साल का प्रतिबंध कंपनी के नए NHAI/MoRTH प्रोजेक्ट्स में बोली लगाने से संबंधित है। कंपनी के पहले से चल रहे या अन्य एजेंसियों से जुड़े सभी प्रोजेक्ट अपने आप रद्द हो जाएंगे, ऐसा आदेश में नहीं कहा गया है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे मामले में NHAI ने प्रभावित हिस्से की मरम्मत और गुणवत्ता सुधारने की प्रक्रिया भी शुरू की है। प्राधिकरण ने बताया था कि प्रभावित हिस्से की बहाली का खर्च कंपनी को अपने स्तर पर उठाना होगा। एक्सप्रेसवे की खामियों के बाद निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं।