पटना नगर निगम के 37% वाहन जर्जर, मल्टी लेवल पार्किंग में धूल फांक रही गाड़ियां; मेंटेनेंस व्यवस्था पर उठे सवाल
पटना नगर निगम की वाहन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निगम के करीब 37 प्रतिशत वाहन जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं और लंबे समय से उपयोग में नहीं हैं। इनमें से कई वाहन मल्टी लेवल पार्किंग के दूसरे तल पर खड़े-खड़े धूल फांक रहे हैं, जबकि नगर निगम हर साल इनके रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च करने का दावा करता है।
जानकारी के अनुसार, निगम के कई पुराने वाहन तकनीकी खराबी, रखरखाव की कमी और समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण कबाड़ जैसी स्थिति में पहुंच गए हैं। इन वाहनों का उपयोग सफाई, कचरा उठाव, जलापूर्ति और अन्य नगर सेवाओं में किया जाता था, लेकिन अब इनमें से बड़ी संख्या संचालन योग्य नहीं रह गई है।
नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, कुल वाहनों में से लगभग 37 प्रतिशत वाहन किसी न किसी कारण से बंद पड़े हैं। इनमें ट्रैक्टर, डंपर, कचरा उठाने वाले वाहन और अन्य उपयोगी गाड़ियां शामिल हैं। इन वाहनों को मल्टी लेवल पार्किंग के दूसरे फ्लोर पर खड़ा कर दिया गया है, जहां वे लंबे समय से अनुपयोगी अवस्था में पड़े हैं।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कई वाहनों की मरम्मत संभव है, लेकिन समय पर पहल नहीं होने के कारण उनकी हालत लगातार खराब होती गई। दूसरी ओर, निगम द्वारा हर वर्ष वाहन रखरखाव और मरम्मत के लिए बजट खर्च किए जाने के बावजूद स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।
नगर निगम की मेंटेनेंस व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वाहनों के रखरखाव के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं, जबकि वास्तविक स्तर पर आवश्यक मरम्मत और तकनीकी सुधार नहीं किए जाते। यही कारण है कि कई वाहन समय से पहले ही बेकार हो गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निगम की सेवाएं काफी हद तक वाहनों पर निर्भर करती हैं। यदि बड़ी संख्या में वाहन निष्क्रिय रहेंगे तो सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और अन्य नागरिक सेवाओं पर सीधा असर पड़ेगा। इससे शहरवासियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इस मामले को लेकर नागरिकों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से खरीदे गए वाहनों का इस तरह बेकार पड़े रहना संसाधनों की बर्बादी है। उन्होंने निगम प्रशासन से जर्जर वाहनों की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
फिलहाल नगर निगम प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, मामले के सामने आने के बाद वाहन रखरखाव और संसाधनों के उपयोग को लेकर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन जर्जर वाहनों के पुनः उपयोग, मरम्मत या निस्तारण को लेकर क्या कदम उठाता है।