23 साल पुराने दुष्कर्म, दहेज प्रताड़ना और तीन तलाक मामले में सजा
भागलपुर की न्यायालय ने 23 साल पुराने एक गंभीर दुष्कर्म, दहेज प्रताड़ना और तीन तलाक मामले में अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी मुहम्मद वसीम उर्फ गुड्डू को दुष्कर्म के लिए सात साल और दहेज प्रताड़ना के लिए तीन साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला वर्ष 2003 में दर्ज किया गया था, जब पीड़िता ने स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके साथ ही, आरोपी ने तीन तलाक देकर पीड़िता के साथ अन्याय किया।
अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद पाया कि आरोपी ने सजा-योग्य अपराध किए हैं, और पीड़िता के बयान और साक्ष्यों के आधार पर उसे दंडित किया जाना आवश्यक था। न्यायालय ने कहा कि “यह मामला समय के बावजूद गंभीर अपराधों से संबंधित है और न्याय को लंबित नहीं रखा जा सकता।”
अदालत के आदेशानुसार, आरोपी को दुष्कर्म के लिए सात साल की कैद और दहेज प्रताड़ना के लिए तीन साल की कैद अलग-अलग सजा के रूप में दी गई है। इसके अलावा, तीन तलाक के मामले में भी आरोपी की नकारात्मक भूमिका को अदालत ने गंभीरता से लिया।
पीड़िता और उसके परिवार ने अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय के संघर्ष के बाद न्याय मिलना समाज में महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस फैसले से अन्य महिलाओं को भी अपने हक के लिए आवाज उठाने की प्रेरणा मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे पुराने मामले अक्सर साक्ष्य और समयसीमा की चुनौतियों के कारण लंबित रह जाते हैं। लेकिन अदालत का यह फैसला यह स्पष्ट करता है कि समय के बावजूद न्याय मिल सकता है, और अपराधियों को उनके कृत्यों की सजा दी जा सकती है।
स्थानीय प्रशासन ने भी इस मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी प्रणाली पूरी तरह सक्रिय है और समाज में दहेज और दुष्कर्म जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
भागलपुर के इस फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि अपराध चाहे कितने भी पुराने क्यों न हों, न्याय निश्चित रूप से होता है। इसके अलावा, यह मामले महिलाओं के खिलाफ हिंसा और दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए समाज में चेतना बढ़ाने में भी मदद करेगा।
इस फैसले के बाद, पुलिस और प्रशासन ने कहा कि वे ऐसे मामलों की जांच और निपटान में तेजी लाएंगे, ताकि पीड़ितों को न्याय पाने में अधिक समय न लगे।