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नालंदा में डेढ़ साल पुराने फ्लाईओवर में 2 क्रैक, पैनल धंसे; लोगों का आरोप- उद्घाटन के बाद से ही मरम्मत का दौर जारी

 

बिहार के नालंदा जिले में करीब डेढ़ साल पुराने फ्लाईओवर में दरार और पैनल धंसने का मामला सामने आया है। फ्लाईओवर के दो हिस्सों में क्रैक आने और पैनल धंसने की सूचना के बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्लाईओवर के उद्घाटन के बाद से ही इसकी स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं और दोनों लेन अब तक पूरी तरह चालू नहीं हो सकी हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, फ्लाईओवर बनने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि इससे इलाके में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और लोगों को जाम से राहत मिलेगी। हालांकि, उनका दावा है कि निर्माण के बाद से ही फ्लाईओवर पर किसी न किसी तरह की मरम्मत का काम चलता रहा है। अब दो जगह क्रैक और पैनल धंसने की जानकारी सामने आने के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई है।

लोगों का कहना है कि फ्लाईओवर जैसी महत्वपूर्ण संरचना में इतनी कम अवधि में दरार आना गंभीर विषय है। उनका सवाल है कि अगर निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन किया गया था तो कुछ ही समय में इसमें मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ रही है। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से पूरे फ्लाईओवर की तकनीकी जांच कराने की मांग की है, ताकि यह पता चल सके कि क्रैक और पैनल धंसने की असली वजह क्या है।

फ्लाईओवर के दोनों लेन के पूरी तरह चालू नहीं होने को लेकर भी स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जिस उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च कर फ्लाईओवर का निर्माण कराया गया, उसका पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। यातायात दबाव कम करने के बजाय निर्माण और मरम्मत के कारण कई बार परेशानी और बढ़ जाती है।

पैनल धंसने की सूचना के बाद सबसे बड़ा सवाल फ्लाईओवर की सुरक्षा को लेकर है। ऐसी संरचना पर रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर प्रभावित हिस्से की तत्काल मरम्मत कराए और जरूरत पड़ने पर यातायात को नियंत्रित किया जाए।

स्थानीय लोगों ने यह भी मांग की है कि सिर्फ क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत करने के बजाय पूरे फ्लाईओवर का तकनीकी ऑडिट कराया जाए। इसमें निर्माण सामग्री, पैनल की मजबूती, जल निकासी और संरचना की भार क्षमता समेत दूसरे तकनीकी पहलुओं की जांच की जानी चाहिए।

फिलहाल फ्लाईओवर में क्रैक और पैनल धंसने की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। स्थानीय लोगों के आरोपों और शिकायतों के बीच संबंधित विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना भी जरूरी है। डेढ़ साल पुरानी संरचना में सामने आई इस समस्या ने निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं