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राजस्थान में अवैध खनन पर बड़ा सवाल, नदियों और नालों से ‘गारनेट’ की खुलेआम लूट का आरोप

 

राजस्थान में अवैध खनन को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं। रिपोर्ट्स और स्थानीय शिकायतों के अनुसार, नदियों और प्रमुख नालों का सीना चीरकर माफिया रोजाना लाखों रुपये के बहुमूल्य खनिज गारनेट (जिसे ‘रेत का सोना’ भी कहा जाता है) की अवैध निकासी कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई क्षेत्रों में दिन-रात मशीनों के जरिए खनन गतिविधियां चल रही हैं, जिससे प्राकृतिक जलधाराओं और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। आरोप है कि संगठित गिरोह इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहे हैं और खनिज संपदा की खुलेआम लूट हो रही है।

गारनेट एक महत्वपूर्ण औद्योगिक खनिज माना जाता है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से अपघर्षक (abrasive) उद्योगों में किया जाता है। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी कीमत होने के कारण इसे ‘रेत का सोना’ भी कहा जाता है। इसी वजह से अवैध खनन माफिया इस पर तेजी से सक्रिय हैं।

खान एवं भूविज्ञान विभाग राजस्थान के अधिकारियों के अनुसार, राज्य में अवैध खनन गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और कई स्थानों पर कार्रवाई भी की गई है। विभाग का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के प्रयास जारी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों और नालों में इस तरह का अनियंत्रित खनन न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि इससे भूजल स्तर और प्राकृतिक संतुलन पर भी गंभीर असर पड़ता है। लगातार खुदाई से नदी तंत्र कमजोर हो रहा है और बाढ़ जैसी स्थितियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाई जाए और अवैध खनन में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में खास सुधार नहीं दिख रहा है।

राज्य सरकार की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि अवैध खनन के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा तथा खनिज संपदा की सुरक्षा के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर राज्य में खनन गतिविधियों की निगरानी और पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो प्राकृतिक संसाधनों को भारी नुकसान हो सकता है।