BDO ने कहा था- ‘तुम कभी अधिकारी नहीं बनोगे’, 15 साल बाद दीपक बने अधिकारी; मां ने गहने गिरवी रखकर पढ़ाया
बिहार में संघर्ष, मेहनत और हौसले की मिसाल पेश करने वाली दीपक की कहानी सामने आई है। कभी एक बीडीओ ने उनसे कहा था कि वह कभी अधिकारी नहीं बन पाएंगे। इस बात को चुनौती मानकर दीपक ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और करीब 15 साल बाद खुद बीडीओ बनकर उस मुकाम तक पहुंचे। उनकी सफलता के पीछे मां का बड़ा त्याग रहा, जिन्होंने बेटे की पढ़ाई के लिए अपने गहने तक गिरवी रख दिए थे।
दीपक का बचपन आर्थिक परेशानियों के बीच गुजरा। परिवार की सीमित आय के बावजूद उनकी मां चाहती थीं कि बेटा पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ा हो। पढ़ाई का खर्च जुटाने में मुश्किल आने पर मां ने अपने गहने गिरवी रख दिए, लेकिन बेटे की पढ़ाई रुकने नहीं दी।
इसी दौरान दीपक को एक बीडीओ की कही बात ने गहरा असर डाला। बताया जाता है कि अधिकारी ने उनसे कहा था कि वह कभी अधिकारी नहीं बनेंगे। यह बात दीपक के लिए निराशा की वजह बनने के बजाय चुनौती बन गई। उन्होंने ठान लिया कि वह मेहनत के दम पर अधिकारी बनकर दिखाएंगे।
इसके बाद दीपक ने लगातार पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। कई वर्षों की मेहनत, संघर्ष और इंतजार के बाद उनका चयन बीडीओ के पद पर हुआ। करीब 15 साल बाद जब वह खुद अधिकारी बने तो उनकी सफलता की कहानी उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई, जो आर्थिक या सामाजिक चुनौतियों के बावजूद सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं।
दीपक की सफलता के पीछे उनकी मां का योगदान भी खास रहा। आर्थिक संकट के बावजूद मां ने बेटे की शिक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपने गहने गिरवी रखकर पढ़ाई का खर्च जुटाया। बेटे के अधिकारी बनने के बाद उनके इस त्याग का सपना भी पूरा हुआ।
नियुक्ति के मौके पर मुख्यमंत्री ने दीपक को नियुक्ति पत्र सौंपा। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद दीपक के परिवार में खुशी का माहौल है। वर्षों की मेहनत के बाद मिली इस सफलता ने परिवार के संघर्ष को एक नई पहचान दी है।
दीपक की कहानी बताती है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। जिस पद को कभी असंभव बताया गया था, उसी पद तक पहुंचकर दीपक ने न केवल अपनी काबिलियत साबित की, बल्कि अपनी मां के त्याग का भी सम्मान बढ़ाया।