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हिमंता बिस्वा सरमा का बड़ा बयान, गौरव गोगोई को बताया ‘पाकिस्तानी एसेट’; पवन खेड़ा पर भी साधा निशाना

 

असम की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। राज्य के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें “पाकिस्तानी एसेट” तक कह दिया। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और विपक्ष ने इसे पूरी तरह अस्वीकार्य और भड़काऊ बताया है।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मीडिया से बातचीत के दौरान दावा किया कि कुछ विपक्षी नेताओं के पाकिस्तान से कथित संबंधों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने इसी संदर्भ में गौरव गोगोई का नाम लेते हुए विवादित टिप्पणी की, जिससे राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

सरमा ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा सकती और यदि किसी व्यक्ति या नेता के विदेशी संपर्कों पर सवाल उठते हैं, तो उसकी जांच जरूरी है। हालांकि, उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक दस्तावेज या प्रमाण पेश नहीं किया है।

इस बयान के तुरंत बाद कांग्रेस पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह बयान लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है। कांग्रेस का कहना है कि बिना सबूत के इस तरह के आरोप लगाना केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है।

इसी क्रम में कांग्रेस प्रवक्ता Pawan Khera ने भी मुख्यमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे नेताओं को जिम्मेदारी के साथ बयान देना चाहिए और इस तरह के आरोप देश की राजनीति को और अधिक विभाजित करते हैं।

पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्षी नेताओं को बदनाम करने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं, लेकिन जनता ऐसे बयानों का सही जवाब देगी। उन्होंने इसे “ध्यान भटकाने की राजनीति” करार दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों और क्षेत्रीय राजनीति को देखते हुए इस तरह की बयानबाजी और तेज हो सकती है। असम की राजनीति पहले भी कई बार केंद्र और राज्य के बीच टकराव और तीखी बयानबाजी का गवाह रही है।

वहीं, कांग्रेस संगठन Indian National Congress के नेताओं ने मांग की है कि मुख्यमंत्री अपने बयान पर स्पष्टीकरण दें या फिर उसे वापस लें। पार्टी का कहना है कि इस तरह के आरोप न केवल व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि लोकतांत्रिक बहस की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं।

फिलहाल, इस पूरे विवाद पर गौरव गोगोई की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक गलियारों में यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

कुल मिलाकर, हिमंता बिस्वा सरमा के बयान ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में तीखी बहस को जन्म दे दिया है, जहां आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता नजर आ रहा है।