आंध्र प्रदेश के चित्तूर में बड़ा फर्जीवाड़ा: कलेक्टर के जाली हस्ताक्षर से जमीन बेचने की साजिश नाकाम, गिरोह हिरासत में
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में एक बड़े जमीन घोटाले की कोशिश का खुलासा हुआ है। जालसाजों ने धारा 22A के तहत प्रतिबंधित 1.11 सेंट जमीन को बेचने के लिए जिला कलेक्टर के जाली हस्ताक्षर से फर्जी आदेश तैयार कर लिया। हालांकि समय रहते सतर्कता बरतने पर यह पूरी साजिश नाकाम कर दी गई।
जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने यह फर्जीवाड़ा करीब 5 लाख रुपये की डील के बाद अंजाम देने की योजना बनाई थी। योजना के तहत वे जमीन का पंजीकरण कराने के लिए पलामनेरू स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे थे। दस्तावेजों की जांच के दौरान सब-रजिस्ट्रार को कागजों में कई खामियां नजर आईं, खासकर दस्तावेज पर तारीख का न होना, जिससे उन्हें शक हुआ।
शक के आधार पर जब दस्तावेजों की गहन जांच की गई तो सामने आया कि जिला कलेक्टर के कथित हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी थे और आदेश भी अवैध रूप से तैयार किया गया था। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके पर मौजूद संदिग्धों को हिरासत में ले लिया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि यह एक संगठित गिरोह हो सकता है, जो प्रतिबंधित भूमि को फर्जी दस्तावेजों के जरिए बेचने का काम करता है।
अधिकारियों ने बताया कि धारा 22A के तहत आने वाली जमीनों की बिक्री पर सख्त प्रतिबंध है, और इसी कानून को दरकिनार करने के लिए जालसाजों ने यह फर्जी आदेश तैयार किया था। हालांकि, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में सतर्कता के चलते यह धोखाधड़ी पकड़ में आ गई।
इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने भी रजिस्ट्रार कार्यालयों को निर्देश जारी किए हैं कि सभी संदिग्ध दस्तावेजों की गहन जांच की जाए और किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए।
पुलिस का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। फिलहाल मामले में आगे की जांच तेजी से चल रही है।