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टेस्ट में सफलता के लिए हालात के हिसाब से ढलना और गेंदबाजी पार्टनर को समझना जरूरी: प्रसिद्ध कृष्णा

 

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ किसी एक खिलाड़ी का अच्छा प्रदर्शन काफी नहीं होता, बल्कि पूरी टीम द्वारा की गई मेहनत ज्यादा मायने रखती है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग हालात में खुद को ढालने और पार्टनरशिप में गेंदबाजी करने की काबिलियत ने उन्हें टेस्ट टीम में अपनी जगह बनाने में मदद की है।

2023 से अब तक 9 टेस्ट मैचों में प्रसिद्ध ने 32 विकेट लिए हैं, जबकि 28 वनडे मैचों में उन्होंने 50 विकेट चटकाए हैं। प्रसिद्ध ने शुक्रवार को 'जियोस्टार' से कहा, "मुझे लगता है कि हालात चाहे जैसे भी हों, खुद को ढालने और अच्छा प्रदर्शन करने की काबिलियत सबसे जरूरी है। आप कहीं भी खेलें, आपको पूरी ताकत और जोश के साथ गेंदबाजी करने के लिए तैयार रहना होगा। अपने गेंदबाजी पार्टनर को समझना भी महत्वपूर्ण है। बल्लेबाजी की तरह ही गेंदबाजी में भी साझेदारी की आवश्यकता होती है। एक-दूसरे का साथ देकर आपको टीम की जरूरत के हिसाब से प्रदर्शन करना होता है।"

भारत अपने घरेलू सीजन की शुरुआत वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन वनडे मैचों की सीरीज से करेगा, जो 27 सितंबर से तिरुवनंतपुरम में शुरू होगी। यह सीरीज आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप 2027 की तैयारी का एक शुरुआती कदम है, इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक अहम घरेलू टेस्ट सीरीज भी होनी है।

घर पर होने वाली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी सीरीज के बारे में बात करते हुए प्रसिद्ध ने कहा कि पांच मैचों की मुश्किल सीरीज के दौरान वर्कलोड और लय को बनाए रखना वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) के फाइनल में पहुंचने के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, "मैंने अब तक दो बार पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का अनुभव किया है - एक बार ऑस्ट्रेलिया में और एक बार इंग्लैंड में - और उन अनुभवों से मैंने बहुत कुछ सीखा है। पांच मैचों और 25 दिनों के क्रिकेट के दौरान लय बनाए रखना एक बिल्कुल अलग चुनौती है। टीम पहले से ही उस चुनौती के लिए तैयारी कर रही है। हर कोई बेहतरीन फॉर्म में है और इस चुनौती का सामना करने के लिए सही सोच रखता है। हम यह भी जानते हैं कि डब्ल्यूटीसी चक्र में यह सीरीज कितनी अहम है, इसलिए मैं इसका बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।"

इंजरी (जिसमें पीठ के निचले हिस्से में स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण हुई सर्जरी भी शामिल है) से उबरने में काफी समय बिताने के बाद, इस लंबे कद के तेज गेंदबाज ने लंबे समय तक चलने वाले रिहैबिलिटेशन (ठीक होने की प्रक्रिया) के दौरान जरूरी मानसिक मजबूती के बारे में बात की। उन्होंने कहा, "चोटिल होना और जारी क्रिकेट मैचों में हिस्सा न ले पाना किसी के लिए भी मुश्किल होता है। रिहैब का सफर बहुत थकाऊ होता है, क्योंकि आपको वही चीजें बार-बार करनी पड़ती हैं। यहीं पर टीम और स्पोर्ट्स साइंस स्टाफ बहुत अहम हो जाते हैं। आपके आस-पास के लोग भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए अच्छे लोगों, खासकर परिवार और दोस्तों के साथ रहना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप चीजों को अपनी मर्जी के मुताबिक होते हुए देखने के लिए कितने बेताब हैं।"

भारतीय तेज गेंदबाज ने आगे कहा, "आराम से बैठकर यह कहना आसान है कि मैं चोटिल था, मैं ज्यादा कुछ नहीं कर सकता था, और वापसी में समय लगेगा। हालांकि, उठने और आगे बढ़ने के लिए आपको मानसिक मजबूती की भी जरूरत होती है। मैं हमेशा खुद से कहता हूं कि अगर चोट लगने के समय मैं किसी खास स्तर पर था, तो वापसी करते समय मुझे उससे दस गुना बेहतर होना चाहिए। यह सोच बहुत आवश्यक है।"

--आईएएनएस

एसएम/डीकेपी