सुमित अंतिल: छोटी उम्र में पिता को खोया, एक हादसे ने बदली जिंदगी, दो पैरालंपिक में गोल्ड जीतकर रचा इतिहास
नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। 'हौसलों के तरकश में कोशिश का वो तीर जिंदा रखो, हार जाओ चाहे जिंदगी में सब कुछ, मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रखो।' ये पंक्तियां भारत के स्टार पैरा भाला फेंक खिलाड़ी सुमित अंतिल पर सटीक बैठती हैं। महज सात साल की उम्र में पिता को खोने वाले सुमित की जिंदगी एक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई, लेकिन अपने मजबूत इरादों और अथक मेहनत के दम पर उन्होंने लगातार दो पैरालंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
सुमित का जन्म 7 जून, 1998 को हरियाणा के सोनीपत जिले के खेवड़ा गांव में हुआ था। जब वह केवल सात वर्ष के थे, तब उनके सिर से पिता का साया उठ गया। इसके बाद उनकी मां ने चारों बच्चों का पालन-पोषण कठिन मेहनत के बल पर किया।
सुमित पढ़ाई में भी काफी अच्छे थे, लेकिन 12वीं कक्षा के दौरान उनकी जिंदगी में एक बड़ा हादसा हो गया। ट्यूशन से बाइक पर घर लौटते समय वह गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए, जिसमें उन्हें अपना एक पैर गंवाना पड़ा। इस घटना के बाद वह निराशा से घिरने लगे।
हालांकि, उनके ही गांव के एक पैरा एथलीट से मुलाकात ने उनकी सोच बदल दी। इसके बाद उन्होंने खेलों में करियर बनाने का फैसला किया और भाला फेंक स्पर्धा को चुना। धीरे-धीरे उन्होंने इस खेल में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी।
टोक्यो पैरालंपिक 2020 में सुमित ने 68.55 मीटर का थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक जीता। इस उपलब्धि ने उनकी जिंदगी को नई दिशा दी और वर्षों के संघर्ष को पहचान मिली।
इसके बाद उन्होंने 2022 में हांगझोउ एशियाई पैरा खेलों में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं, 2023 और 2024 में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उनका शानदार प्रदर्शन जारी रहा और उन्होंने शीर्ष स्थान हासिल किया।
इसके बाद साल 2024 में पेरिस पैरालंपिक में सुमित ने 70.59 मीटर का थ्रो फेंकते हुए रिकॉर्ड बना डाला। गोल्ड मेडल जीतने के साथ-साथ वह पैरालंपिक में सर्वश्रेष्ठ थ्रो करने वाले खिलाड़ी भी बने। इसके साथ ही सुमित ने लगातार दो पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा।
--आईएएनएस
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