नीतू घंघास: रोज 40 किलोमीटर का सफर, पिता ने बॉक्सर बनाने में निभाई अहम भूमिका; कॉमनवेल्थ गेम्स और विश्व चैंपियनशिप में जीता गोल्ड
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय महिला बॉक्सर नीतू घंघास किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। नीतू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में और विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है। हालांकि, इन उपलब्धियों तक पहुंचने का नीतू का सफर चुनौतियों से भरा रहा।
नीतू घंघास का जन्म 19 अक्टूबर 2000 को हरियाणा के भिवानी जिले में हुआ। भिवानी को भारतीय बॉक्सिंग का गढ़ माना जाता है और विजेंदर सिंह जैसे दिग्गज मुक्केबाज यहीं जन्मे हैं। यही वजह थी कि नीतू का भी इस खेल से शुरुआत से ही खास लगाव था। उनके पिता जय भगवान ने पहली बार उन्हें बॉक्सिंग से परिचित कराया। नीतू ने महज 12 साल की उम्र में ही ट्रेनिंग शुरू कर दी थी। हालांकि, शुरुआत में नीतू को मुक्केबाजी में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा और उन्होंने इस खेल को छोड़ने तक का फैसला कर लिया था।
हालांकि, नीतू के पिता ने समय-समय पर उनका साहस बढ़ाया। नीतू के पिता ने बेटी को बॉक्सर बनाने की खातिर अपनी नौकरी से तीन वर्ष की अवैतनिक छुट्टी ले ली। छुट्टी के साथ-साथ पिता ने छह लाख रुपये का कर्ज लिया और नीतू को बॉक्सर बनाने की जिम्मेदारी व्यक्तिगत तौर पर संभाली। जय भगवान नीतू की ट्रेनिंग के साथ-साथ उनके खान-पान का भी पूरा ख्याल रखते थे।
नीतू के करियर में अहम मोड़ तब आया, जब मशहूर कोच जगदीश सिंह की निगाह उन पर पड़ी। इसके बाद नीतू ने भिवानी के बॉक्सिंग क्लब में ट्रेनिंग शुरू कर दी। नीतू ट्रेनिंग के लिए हर रोज 40 किलोमीटर का सफर पिता के साथ स्कूटर से तय करती थीं। नीतू ने साल 2017 में यूथ इंटरनेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके बाद 2018 में नीतू एशियाई और यूथ चैंपियन भी बनीं। कोविड-19 के चलते आए ठहराव ने कुछ हद तक नीतू के खेल पर असर डाला लेकिन वह जबरदस्त वापसी करने में सफल रहीं।
2021 में उन्होंने सीनियर नेशनल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। नीतू के करियर का सबसे बड़ा पल साल 2022 में आया, जब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के ट्रायल के दौरान उनका सामना अपनी आदर्श मैरी कॉम से हुआ। घुटने की चोट के कारण मैरी कॉम इस मैच में दिक्कत में रहीं और नीतू जीत दर्ज करने में कामयाब रहीं।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में नीतू ने दमदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके बाद 2023 में हुई महिला विश्व चैंपियनशिप में भी उनका जलवा देखने को मिला और उन्होंने खिताब को अपने नाम किया। वह पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहीं और उन्होंने महज 22 साल की उम्र में विश्व चैंपियन कहलाने का तमगा हासिल किया। साल 2024 में नीतू को सरकार द्वारा 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
--आईएएनएस
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