'मेरे पिता को मेरी सफलता का श्रेय जाता है', तीरंदाजी में गोल्ड जीतने वाली कीर्ति शर्मा का बयान
नागोया, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। एशियन गेम्स में भारत की महिला रिकर्व टीम ने गोल्ड मेडल जीता। इस टीम में कीर्ति शर्मा शामिल थीं, जिनका संबंध हरियाणा से है। रिटौली जैसे आम गाँव से निकलकर एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने का कीर्ति का सफर काफी मुश्किलों भरा रहा है। कीर्ति ने साई, हजारीबाग में अपनी तीरंदाजी की प्रतिभा को निखारा है।
कीर्ति ने साई मीडिया को बताया, "बचपन से ही मेरी सेहत खराब थी। मुझे अलग-अलग जगहों से बहुत सारी नकारात्मक टिप्पणियाँ सुनने को मिलती थीं, जिनमें आर्चरी में मेरी काबिलियत पर शक जताया जाता था। इसकी वजह मेरी शारीरिक स्थिति अच्छी न होना था। शुरू में मुझे भारी वजन वाले धनुष उठाने में भी मुश्किल होती थी। लेकिन मैंने ठान लिया था कि मैं अपने आलोचकों को गलत साबित करने के लिए कुछ भी करूँगी।"
19 साल की कीर्ति ने अपने परिवार, खासकर अपने पिता विजय शर्मा को मुश्किल समय में उसके साथ खड़े रहने और उसकी सफलता की नींव रखने का श्रेय दिया।
उन्होंने कहा, "मेरे पिता एक किसान हैं। लेकिन उन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया है और पैसे की तंगी के बावजूद मेरे खेल करियर से जुड़े सभी खर्चों का ध्यान रखा है।
कई लोगों ने मेरे पिता से कहा कि उन्हें मुझे लड़की होने की वजह से खेल में जाने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। उन्होंने मेरी खराब सेहत के कारण मेरे सफल होने की काबिलियत पर भी शक जताया। लेकिन मेरे पिता ने हमेशा मुझ पर भरोसा किया।"
स्टार तीरंदाज ने कहा कि एशियन गेम्स में जीत का रास्ता बनाने के लिए साई और उनके कोच उद्धम सिंह तारीफ के हकदार हैं।
कीर्ति ने कहा, "मेरे परिवार और मेरे कोच ने हमेशा मेरा साथ दिया है और मुझे यकीन दिलाया है कि मैं कमाल कर सकती हूँ। मैं साई, हजारीबाग में ट्रायल्स के लिए सिर्फ इसलिए गई क्योंकि मेरे कोच उद्धम सिंह का वहाँ ट्रांसफर हो गया था। अपने शुरुआती वर्षों में, मैं उद्धम सर की शुरू की हुई एक अकादमी में ट्रेनिंग करती थी। चार साल पहले मैं साई, हजारीबाग गई थी। उस समय से मेरे करियर में बहुत सुधार हुआ है। मैंने जो कुछ भी हासिल किया है, उसके लिए साई और उद्धम सिंह को श्रेय जाता है।"
कीर्ति शर्मा, अंकिता भगत और कुमकुम मोहोद की भारतीय महिला रिकर्व टीम ने फाइनल में मजबूत दक्षिण कोरिया को हराकर गोल्ड मेडल जीता था और एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया। भारतीय तिकड़ी ने एशियन गेम्स में इस इवेंट में दक्षिण कोरिया का 44 साल का दबदबा तोड़ा।
--आईएएनएस
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