मेरा लक्ष्य सिर्फ मेडल जीतना नहीं, बल्कि लगातार बेहतर होते रहना है: नितेश कुमार
नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत के पैरालंपिक चैंपियन और कई बार गोल्ड मेडल जीत चुके पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी नितेश कुमार ने इस खेल में लगभग हर बड़ा मेडल जीता है। हाल ही में उन्होंने एशियन पैरा गेम्स में मेंस सिंगल्स एसएल3 कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता और थुलसिमथी मुरुगेसन के साथ मिलकर मिक्स्ड डबल्स एसएल3-एसयू5 इवेंट में सिल्वर मेडल हासिल किया।
वह सिंगल्स इवेंट में मौजूदा पैरालंपिक चैंपियन भी हैं। पिछली बार पेरिस में उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन के डैनियल बेथेल को हराकर गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा, नितेश ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी चार मेडल जीते हैं - दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज। इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने के बाद भी नितेश में आगे बढ़ने का जज्बा कायम है। उनका कहना है कि खेल के प्रति उनका प्यार और भारत के लिए और अधिक गोल्ड मेडल जीतने की चाहत ही उन्हें लगातार प्रेरित करती रहती है।
नितेश कुमार ने 'आईएएनएस' से खास बातचीत में कहा, "मुझे लगता है कि यह खेल के प्रति मेरे प्यार की वजह से है। जो मैं कर रहा हूं, उसे करने में मजा आता है। मुझे पता होता है कि मैं कब इस खेल का आनंद ले रहा हूं और कब अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहा हूं। मैं हर टूर्नामेंट में जाकर अपना बेस्ट देना चाहता हूं। मेरा लक्ष्य सिर्फ मेडल जीतना नहीं है, बल्कि लगातार आगे बढ़ना और बेहतर होना है। इसी कारण मैं हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करता हूं। अगर मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता हूं, तो मुझमें गोल्ड मेडल जीतने की पूरी क्षमता है। हां, जब मैं गोल्ड मेडल जीतता हूं और भारत के मेडल टैली में एक और गोल्ड मेडल जुड़ता है, तो मुझे बहुत खुशी होती है। यही बात मुझे हर टूर्नामेंट में प्रेरित करती रहती है।"
नितेश ने कहा, "मेरे अंदर ये क्षमताएं हैं। मुझे बस अपनी पूरी ऊर्जा को सही दिशा में लगाना है और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। कभी-कभी ऐसा हो जाता है, और कभी-कभी नहीं भी हो पात, लेकिन हां, जब ऐसा नहीं होता, तो हम उससे कुछ और सीखते हैं। बेशक, जीतने से भी हम कुछ न कुछ सीखते ही हैं, पर जब हम नहीं जीतते, तो हम उससे कुछ सबक लेते हैं—जैसे कि अगली बार के लिए हमें क्या सुधारना है। फिर अगली बार अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए मैदान में उतरना और देश के लिए ज्यादा से ज्यादा मेडल जीतना—यही चीज मुझे हमेशा प्रेरित करती रही है।"
पेरिस पैरालंपिक के सिंगल्स इवेंट में गोल्ड और एशियन पैरा गेम्स में दो गोल्ड (एक मेंस डबल्स में और एक सिंगल्स में) जीतने वाले नितेश के मेडल कलेक्शन में अब बस वर्ल्ड चैंपियनशिप का गोल्ड ही आना बाकी है, जो उन्हें हमेशा खटकता रहता है। उन्होंने कहा, "हां, बिल्कुल। वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेरे पास दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल हैं। हालांकि, वहां मेरे पास कोई गोल्ड नहीं है, तो यह एक ऐसी चीज है जो कहीं न कहीं, मेरे मन में हमेशा खटकती रहती है।"
"हालांकि, मुझे लगता है कि अगर मैं सिर्फ नतीजों पर ध्यान न दूं, तो पिछले कुछ वर्षों में मेरा विकास शानदार रहा है। इसलिए मेरा मुख्य लक्ष्य यही है कि पैरालंपिक गेम्स में भी मैं इसी लय को बनाए रखूं। हां, जहां तक वर्ल्ड चैंपियनशिप की बात है, तो मेरा लक्ष्य बस यही है कि मैं वह एक मेडल भी हासिल कर लूं, जो अभी मेरे कलेक्शन में नहीं है।"
उन्होंने जापान के आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स 2026 के फाइनल में प्रमोद भगत को हराया। इससे तीन साल पहले, हांगझोऊ पैरा गेम्स के फाइनल में उन्हें प्रमोद से हार का सामना करना पड़ा था। गोल्ड मेडल के लिए हुए इस रीमैच की तैयारियों के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने धैर्य बनाए रखा, क्योंकि उन्हें पता था कि प्रमोद कभी भी मैच का पासा पलट सकते हैं।
नितेश ने प्रमोद के खिलाफ फाइनल की अपनी तैयारियों पर कहा, "कोई खास अलग तैयारी नहीं थी, क्योंकि हम पूरे साल सर्किट में कई बार एक-दूसरे के खिलाफ खेलते रहे हैं। हालांकि, हां, पिछले टूर्नामेंट से मैंने यह जरूर सीखा कि जब तक मैच पूरी तरह खत्म न हो जाए, तब तक कुछ भी पक्का नहीं होता। जब तक खेल खत्म नहीं होता, प्रमोद हमेशा और मजबूत होकर वापसी कर सकते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "इसी वजह से पहले गेम में मेरी कोशिश उन पर दबाव बनाने की थी। दूसरे गेम में भी मैंने खुद को खेल में बनाए रखा ताकि उन पर दबाव बना रहे। और जब मैच खत्म होने के करीब था, तो मैं खुद से यही कहता रहा कि अभी काम पूरा नहीं हुआ है। मुझे वही गलती नहीं दोहरानी थी जो मैंने हांगझोऊ में की थी। इसके बाद मैंने हर एक प्वाइंट के लिए उसी जोश और भूख के साथ खेलना जारी रखा।"
वर्ल्ड चैंपियनशिप के अलावा, उनकी नजर लॉस एंजिल्स पैरालंपिक्स पर भी है, जहां वे अपने गोल्ड मेडल का बचाव करेंगे। वह चाहते हैं कि वहां फाइनल में केवल भारतीय खिलाड़ी ही पहुंचें, ताकि मेडल जीतने का दबाव कम हो सके। उन्होंने कहा, "जैसे जब मैं पेरिस पैरालंपिक्स की ओर बढ़ रहा था, तो मेरा एक ही लक्ष्य था - उस खिताब का बचाव करना जिसे प्रमोद भगत ने टोक्यो में जीता था। मेरा मुख्य मकसद बस यही था। ऐसा नहीं था कि मुझे हर हाल में गोल्ड जीतना है या बेथेल (ग्रेट ब्रिटेन के डेनियल बेथेल) को हराना है। मेरे लिए बस एक ही बात मायने रखती थी कि गोल्ड मेडल भारत के पास ही रहे। अब आगे लॉस एंजिल्स गेम्स आ रहे हैं, जहां मैं और प्रमोद दोनों ही हिस्सा लेंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि मैं उस सोच से थोड़ा मुक्त हो जाऊंगा, क्योंकि जब हमारे पास दो मजबूत दावेदार होते हैं, तो जिम्मेदारी हम दोनों पर आ जाती है। ऐसे में हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश कर सकते हैं। अगर हम इसे एक 'ऑल-इंडिया फाइनल' (जिसमें दोनों खिलाड़ी भारत से हों) बना सकें, तो मुझे लगता है कि फाइनल में हम पर उतना दबाव नहीं होगा। इसी कारण बस यही है कि हमें वहां जाकर भारत के लिए वही परिणाम दोहराना है।"
"मगर हां, उससे पहले हमारा लक्ष्य अपने तरीके से खेलों के लिए क्वालीफाई करना है। एक बार जब हम क्वालीफाई कर लेंगे, तो हम लॉस एंजिल्स गेम्स में अपने मनचाहे नतीजों के बारे में सोच सकते हैं। हालांकि, हमारा मुख्य लक्ष्य यही होगा कि अगले चार वर्षों तक भारत के लिए फिर से पदक हासिल किया जाए।"
--आईएएनएस
एसएम/डीकेपी