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IND vs WI: 249 रन बनाकर भी क्यों हारी टीम इंडिया? ओस, रोस्टन चेज और मयंक यादव से जुड़ी 3 बड़ी वजहें

 

रांची में शुक्रवार को खेले गए दूसरे टी-20 मुकाबले में भारतीय टीम 249 रन बनाने के बावजूद जीत हासिल नहीं कर सकी। वेस्टइंडीज ने 250 रन का लक्ष्य हासिल कर भारत को 6 विकेट से हरा दिया। कैरेबियाई बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी की और पारी में 20 छक्के जड़कर मैच का रुख अपनी तरफ कर लिया।

वेस्टइंडीज का यह प्रदर्शन टी-20 इंटरनेशनल में भारत के खिलाफ सबसे बड़े सफल रनचेज का रिकॉर्ड बना। भारतीय टीम ने बल्लेबाजी में बड़ा स्कोर खड़ा किया, लेकिन गेंदबाज उसे बचाने में नाकाम रहे। आखिर इतनी बड़ी पारी खेलने के बाद भी भारत को हार का सामना क्यों करना पड़ा? इसके पीछे तीन प्रमुख वजहें सामने आईं।

1. ओस ने भारतीय गेंदबाजों की मुश्किलें बढ़ाईं

रांची में मुकाबले के दौरान ओस भारतीय गेंदबाजों के लिए बड़ी चुनौती साबित हुई। दूसरी पारी में गेंद गीली होने के कारण उसे पकड़ना और सही दिशा में स्पिन कराना मुश्किल हो गया। इसका असर खास तौर पर स्पिन गेंदबाजों के प्रदर्शन पर देखने को मिला।

अक्षर पटेल, कुलदीप यादव और नमन धीर ने मिलकर 9.3 ओवर में 141 रन खर्च कर दिए। वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए बड़े शॉट लगाए। तेज गेंदबाजों को भी गीली गेंद के कारण सही लेंथ और नियंत्रण बनाए रखने में परेशानी हुई।

हालांकि, ओस को हार की एक अहम वजह माना जा सकता है, लेकिन इतने बड़े लक्ष्य का बचाव करते समय गेंदबाजों की लाइन-लेंथ और रणनीति भी महत्वपूर्ण होती है।

2. रोस्टन चेज ने मिडिल ओवर्स में लगाई रनगति पर लगाम

भारतीय टीम एक समय तेजी से बड़े स्कोर की तरफ बढ़ रही थी। 10 ओवर में टीम के 127 रन हो चुके थे और बल्लेबाज लगातार बड़े शॉट खेल रहे थे। ऐसे में 270 से 275 रन तक पहुंचने की संभावना दिखाई दे रही थी।

लेकिन वेस्टइंडीज के रोस्टन चेज ने मिडिल ओवर्स में प्रभावी गेंदबाजी की। उन्होंने अपने चार ओवर में केवल 24 रन दिए और तीन विकेट हासिल किए। उनके इस स्पेल ने भारतीय बल्लेबाजी की रफ्तार को धीमा कर दिया।

इसका असर अंतिम स्कोर पर भी पड़ा। जिस पिच पर बल्लेबाज तेजी से रन बना रहे थे, वहां अतिरिक्त 20 से 30 रन भारत के लिए फायदेमंद हो सकते थे। हालांकि, यह कहना मुश्किल है कि ज्यादा रन बनने से जीत निश्चित हो जाती, क्योंकि वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी उस दिन शानदार लय में थी।

3. मयंक यादव के बचे हुए ओवर इस्तेमाल नहीं हुए

भारतीय गेंदबाजी रणनीति को लेकर एक सवाल मयंक यादव के इस्तेमाल पर भी उठता है। मयंक ने मैच में तीन ओवर गेंदबाजी की और तीन विकेट हासिल किए। उनके प्रदर्शन से लग रहा था कि वह वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में सक्षम हैं।

इसके बावजूद पावरप्ले के बाद उन्हें दोबारा गेंदबाजी का मौका नहीं मिला। जब वेस्टइंडीज तेजी से लक्ष्य की ओर बढ़ रहा था, उस समय मयंक के बचे हुए ओवर उपयोगी साबित हो सकते थे।

कप्तान और टीम प्रबंधन के सामने उस समय विकेट निकालने के साथ रनगति रोकने की चुनौती थी। ऐसे में मयंक को दोबारा गेंदबाजी देने का विकल्प चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि उनके ओवर इस्तेमाल करने से मैच का नतीजा बदल जाता।

बड़ा स्कोर बनाने के बाद भी भारत को नहीं मिली जीत

रांची के इस मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने 249 रन बनाकर अपनी क्षमता दिखाई, लेकिन गेंदबाजी के दौरान टीम लक्ष्य का बचाव नहीं कर सकी। ओस का असर, रोस्टन चेज की किफायती गेंदबाजी और मयंक यादव के ओवरों का इस्तेमाल नहीं होना मैच के प्रमुख चर्चा वाले पहलू रहे।

वेस्टइंडीज ने आक्रामक बल्लेबाजी के दम पर 250 रन का लक्ष्य हासिल किया। इस हार से भारतीय टीम को बड़े स्कोर का बचाव करने की रणनीति, ओस में गेंदबाजी और अहम मौकों पर गेंदबाजों के इस्तेमाल जैसे पहलुओं पर विचार करना होगा।