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भारत का ये “चंडीदास” क्रिकेट के मैदान में चलाता था अपनी “दादागिरी” और आज भी लोग ठोकते हैं इसे सलाम!

 

सौरव गांगुली की गिनती भारत की सबसे सफल कप्तानों के रुप में होती है, भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और क्रिकेटर की रुप में इन्होंने अपनी पहचान बनाई है । बंगाल के एक परिवार में 8 जुलाई 1972 में हुआ, और बताया जाता है अपने भाई स्नेहशील के द्वारा ये क्रिकेट की दुनिया में लाए गए  थे।

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बताया  जाता है कि साल 1996 में इंग्लैंड द्वौरे के लिए जब टीम इंडिया का ऐलान हुआ, तो उस टीम मेें एक ऐसा नाम भी था। जिसको लेकर तमाम लोगों की आपत्ति थी, दरअसल उसी साल भारत में खेले गए विश्वकप ंमें अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी कांबली को चुना गया था। उस दौरान यह भी आरोप लगे की जगमोहन डालमिया के प्रभाव के चलते उन्हें टीम में शामिल किया गया था।

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क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लाडर्स के मैदान पर गांगुली ने अपनी टेस्ट क्रिकेट की शुुरुआत की थी । और लाडर्स मैदान पर 131 रन की पारी अपने आलोचकों का मुंह बंद कर दिया ।बतौर बल्लेबाज टीम इंडिया का अहम हिस्सा बनने के बाद, गांगुली की जिंदगी अहम पड़ाव साल 2002 में आया। लगातार नाकामी मिलने के बाद तेंदुलकर कप्तानी छोड़ चुके थे। मैच फिक्सिंग के वजह से टीम इंडिया का मनोबल गिर गया , और फैंस का भरोसा भी टूटने की कगार पर था ।

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और ऐसे वक्त में ही गांगुली ने टीम ंइंडिया की कप्तानी संभाली, और टीम इंडिया को  ऐसे मुकाम पर भी पहुंचाया जिसने टीम इंडिया को भारत के बहार भी मैच जीतने के काबिल बनाया । सौरव गांगुली की कप्तानी में 1983 के बाद  पहली बार 2003 में विश्वकप के फाइनल मेें  पहुंची थी। गांगुली ने अपने अक्रामक रुख के लिए हमेशा से चर्चा में रहे हैं और इनके ग्रैग चैपल के साथ भी विवाद रहे । 2008 में इन्होंने क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।

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