AI के गलत इस्तेमाल पर भड़के कोच गंभीर, इनपर ठोका 2.5 करोड़ रुपये का मुकदमा
गौतम गंभीर ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने AI-जनरेटेड डीपफेक, नकली वीडियो और बिना इजाज़त बेचे जा रहे सामान के खिलाफ तुरंत राहत की मांग की है, और ₹2.5 करोड़ के हर्जाने की मांग की है। गंभीर ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है, जिसे उनकी कानूनी टीम "डिजिटल पहचान की चोरी का एक सुनियोजित अभियान" बता रही है। इस अभियान में AI-जनरेटेड डीपफेक, वॉयस क्लोनिंग और उनकी पहचान का बिना इजाज़त व्यावसायिक इस्तेमाल शामिल है। गंभीर ने कहा, "मेरी पहचान—मेरा नाम, मेरा चेहरा और मेरी आवाज़—का गलत जानकारी फैलाने और आर्थिक फायदे के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया है।"
उन्होंने इस मुद्दे को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में कानूनी सुरक्षा उपायों से जुड़ा मामला बताया। कमर्शियल डिवीज़न में दायर इस मामले में तुरंत 'एक्स-पार्टे एड-अंतरिम निषेधाज्ञा' (एकतरफा अंतरिम रोक) की मांग की गई है, ताकि आपत्तिजनक सामग्री को तेज़ी से हटाया जा सके और उसे आगे फैलने से रोका जा सके। शिकायत में बताया गया है कि 2025 के आखिर से Instagram, X, YouTube और Facebook जैसे प्लेटफॉर्म पर नकली सामग्री में भारी बढ़ोतरी हुई है। इनमें सबसे खास एक बहुत ज़्यादा वायरल, मनगढ़ंत वीडियो था जिसमें उनके "इस्तीफे" की बात कही गई थी, जिसे 2.9 मिलियन से ज़्यादा बार देखा गया; साथ ही एक और वीडियो था जिसमें उन्हें गलत तरीके से वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रहे सीनियर क्रिकेटरों के बारे में टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था, जिसे 1.7 मिलियन से ज़्यादा बार देखा गया।
इस मामले में Amazon और Flipkart जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिना इजाज़त उनके नाम और चेहरे का इस्तेमाल करके बेचे जा रहे नकली सामान का मुद्दा भी उठाया गया है। कुल 16 व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रतिवादी बनाया गया है; इनमें सोशल मीडिया अकाउंट रखने वालों से लेकर Meta Platforms Inc., X Corp. और Google LLC जैसे मध्यस्थ प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इसके अलावा, सरकारी निकायों—जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग शामिल हैं—को भी इस मामले में पक्षकार बनाया गया है। गंभीर ने ₹2.5 करोड़ के हर्जाने, उनके नाम, छवि, आवाज़ या व्यक्तित्व के इस्तेमाल पर स्थायी रोक और आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के निर्देश देने की मांग की है। इस मामले का नतीजा इस बात पर दूरगामी असर डाल सकता है कि भारतीय अदालतें मशहूर हस्तियों से जुड़े मामलों—जैसे डीपफेक, AI छेड़छाड़ और डिजिटल पहचान की चोरी—को कैसे देखती हैं।