×

क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल करना हमारे लिए खुशकिस्मती, गंभीर जैसे खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देना सौभाग्य: कोच संजय भारद्वाज

 

पुरी, 15 अगस्त (आईएएनएस)। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर के बचपन के कोच संजय भारद्वाज 2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में क्रिकेट की वापसी को सौभाग्य मानते हैं। गुरु द्रोणाचार्य अवार्डी कोच का मानना है कि इस पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद उनका देश के प्रति दायित्व और अधिक बढ़ गया है।

ओडिशा के पुरी शहर में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे संजय भारद्वाज ने 'आईएएनएस' से कहा, "महाप्रभु जी के दर्शन करने के बाद, मैं बहुत धन्य महसूस कर रहा हूं। ऐसे दर्शन हर किसी को नहीं मिलते। ऐसा लगता है जैसे हमें बुलाया गया हो और कहा गया हो—आओ, तुम्हें दर्शन कराए जाएंगे।"

संजय भारद्वाज को साल 2019 में खेल कोचिंग (लाइफ टाइम श्रेणी) के लिए गुरु द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजा गया था। एलबी शास्त्री क्रिकेट एकेडमी का संचालन करने वाले संजय भारद्वाज ने कहा, "मेरी एकेडमी से कम से कम 150 खिलाड़ियों ने रणजी ट्रॉफी खेली है, लगभग 40 से 45 खिलाड़ियों ने आईपीएल में हिस्सा लिया है, और करीब 12 से 15 लड़के-लड़कियों ने भारत का प्रतिनिधित्व किया है। जब मुझे द्रोणाचार्य अवॉर्ड मिला, तो मैंने गौतम गंभीर, अमित मिश्रा, योगेंद्र सरवन, रुमेली धर, रीमा मल्होत्रा, उन्मुक्त चंद, नीतीश राणा, आर्यन जुयाल जैसे खिलाड़ियों का जिक्र किया था।"

बचपन में गौतम गंभीर जैसे दिग्गज खिलाड़ी को ट्रेनिंग देने वाले संजय भारद्वाज ने अपने शिष्य की तारीफ में कहा, "गौतम गंभीर जैसे खिलाड़ी को देखिए। शुरू से ही वे एक बात को लेकर पक्के और जिद्दी थे। वह हमेशा कहते थे कि 'मुझे जीतना है।' आज भी, वे देश को जिताने के खिलाड़ियों की मदद करते हैं। मेरा सौभाग्य है कि गौतम गंभीर जैसे बच्चे मेरे पास आते हैं। अभी प्रियांश आर्य भी शानदार खेल रहे हैं। आगे भी ऐसे खिलाड़ी आते रहेंगे। ये प्रभु का आशीर्वाद है।"

2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में क्रिकेट की 128 साल बाद वापसी हो रही है। इसे संजय भारद्वाज सौभाग्य मानते हैं, जिसमें भारत के लिए पदक जीतने की प्रबल संभावना है। उन्होंने कहा, "यह हमारा सौभाग्य है कि अब क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल कर लिया गया है। इससे हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। अगर मुझे गुरु द्रोणाचार्य अवार्ड मिला है, तो ये मेरा दायित्व बनता है कि देश के लिए और काम करूं।"

--आईएएनएस

आरएसजी