'चोट से वापसी के बाद आत्मविश्वास की जरूरत होती है', दूसरे टी-20 में अपने शानदार प्रदर्शन पर बोले नीतीश रेड्डी
नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। अफगानिस्तान के खिलाफ खेले गए दूसरे टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में चोट से वापसी कर रहे नीतीश कुमार रेड्डी को एक बड़ा बूस्ट मिला। नीतीश ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट अपने नाम किए, जिसके लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' भी चुना गया।
सीरीज के पहले मैच में औसत प्रदर्शन के बाद, नीतीश ने कहा कि दूसरे मैच में मिले अच्छे प्रदर्शन से उन्हें वह आत्मविश्वास मिला जिसकी उन्हें वापसी के दौरान जरूरत थी। नीतीश ने बुधवार को बीसीसीआई के एक वीडियो में कहा, "बहुत अच्छा लग रहा है। चोट से वापसी करने वाले हर खिलाड़ी को आत्मविश्वास की जरूरत होती है। सच कहूं तो, पहला मैच मेरे लिए उतना अच्छा नहीं रहा था, लेकिन दूसरे मैच में अपने प्रदर्शन से बहुत खुश हूं, क्योंकि किसी भी खिलाड़ी को ऐसे आत्मविश्वास की जरूरत होती है और मुझे उम्मीद है कि मैं इस आत्मविश्वास को आगे भी बनाए रखूंगा।"
नीतीश ने 24 रन देकर 3 विकेट चटकाए। उन्होंने अहम भूमिका निभाते हुए भारत को अफगानिस्तान को 159/8 पर रोकने और फिर 7 विकेट शेष रहते हुए लक्ष्य हासिल करने में मदद की। 22 वर्षीय खिलाड़ी का यह शानदार प्रदर्शन ऐसे समय आया, जब उन्होंने हाल ही में बताया था कि फिटनेस हासिल करने के लिए उन्होंने बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कड़ी मेहनत की थी।
ऑलराउंडर ने टीम में शामिल होने के बाद से भारतीय टीम मैनेजमेंट से मिले आत्मविश्वास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस समर्थन की वजह से वह अपनी जगह की चिंता किए बिना अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर पाए हैं। उन्होंने आगे कहा, "भारतीय टीम का हिस्सा बनना हमेशा से सम्मान की बात रही है। जाहिर है कि मैनेजमेंट ने मुझे काफी मौके दिए हैं और मुझ पर बहुत भरोसा जताया है। मुझे लगता है कि एक खिलाड़ी को असल में इसी चीज की जरूरत होती है और मुझे मैनेजमेंट से यही मिल रहा है। मैं इससे काफी खुश हूं।"
हालांकि, चोट से वापसी का सफर मानसिक चुनौती भी लेकर आया। नीतीश ने बताया कि सीओई में लंबे समय तक रहना मानसिक रूप से थका देने वाला होता है, भले ही वहां सभी सुविधाएं और ट्रेनिंग मौजूद हों। ऐसे में करीबी दोस्तों और परिवार से बातचीत ने उन्हें थकान से निपटने में मदद की।
उन्होंने कहा, "मेरे कुछ बहुत अच्छे दोस्त हैं, मैं उनसे रोज बात करता हूं। सीओई में मानसिक रूप से बहुत थकान हो जाती है। जाहिर है कि वहां ट्रेनिंग करने, अच्छा प्रदर्शन करने और अपनी काबिलियत को बढ़ाने के लिए इतनी सारी सुविधाएं मिलना बहुत अच्छा लगता है। मगर मैं कहूंगा कि मैं अपने दोस्तों और परिवार से बात करता हूं और कभी-कभी 1-2 दिन के लिए घर जाकर वापस आ जाता हूं। इससे थोड़ा सुकून मिलता है, लेकिन हां, मानसिक सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है।"नीतीश के लिए एक ऑलराउंडर होने के नाते काम के बोझ को देखते हुए अपने शरीर का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है। हालांकि, चोटों को स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन उनका मानना है कि मुश्किलों का सामना करने के लिए सही सोच रखना सबसे जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा, "चोटें तो लगती ही हैं। शायद इसलिए कि मैं एक ऑलराउंडर हूं, मुझ पर काम का बोझ अधिक होता है। मुझे उन पर नजर रखनी होती है, रिकवर करना होता है। मैं सब कुछ सही कर रहा हूं, लेकिन कभी-कभी, जब चोट लगती है, तो बुरा लगता है और मैं कहूंगा कि यह सब सोच पर निर्भर करता है।ऐसे समय में आपको बहुत मजबूत रहना होता है। आपको किसी भी नकारात्मक बात या नकारात्मक लोगों को उस समय आप पर हावी नहीं होने देना चाहिए। बस मानसिक रूप से सकारात्मक रहें और अच्छा काम करते रहें, भगवान सही समय पर आपको फल देंगे।"
--आईएएनएस
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