बजरंग पुनिया: विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 4 पदक जीतने वाले इकलौते पहलवान, ओलंपिक में जीता था पदक
नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। कुश्ती भारत का एक परंपरागत खेल है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय पहलवानों ने अपनी कड़ी मेहनत से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सफलता प्राप्त करते हुए भारतीय कुश्ती को बड़ी पहचान दिलायी है। जिन पहलवानों ने भारतीय कुश्ती को ऊंचाई पर पहुंचाया है, उनमें बजरंग पुनिया का नाम प्रमुख है।
बजरंग पुनिया का जन्म 26 फरवरी 1994 को खुदान, झज्जर, हरियाणा में हुआ था। हरियाणा को भारतीय पहलवानी का गढ़ माना जाता है। पुनिया पर भी इसका प्रभाव पड़ा। पुनिया ने 7 साल की उम्र से कुश्ती का अभ्यास शुरू किया था। उन्हें अपने पिता का भरपूर सहयोग मिला। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण के बाद 2008 में वह दिल्ली स्थित छत्रसाल स्टेडियम में प्रशिक्षण के लिए आ गए। 2013 से वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने लगे और बड़ी सफलता अर्जित की। फ्रीस्टाइल कुश्ती में महारत रखने वाले पुनिया अधिकांश फाइट 65 किग्रा भारवर्ग में लड़े है।
पुनिया विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में चार मेडल जीतने वाले अकेले भारतीय पहलवान हैं। बजरंग पुनिया का करियर बेहद सफल रहा है। वे ओलंपिक में भारतीय टीम को पदक दिला चुके हैं। टोक्यो ओलंपिक में बजरंग ने फ्रीस्टाइल कुश्ती में कांस्य पदक जीता था। विश्व चैंपियनशिप में रजत और कांस्य, एशियन गेम्स में स्वर्ण और रजत, एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण, रजत, और कांस्य, और कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 और 2022 में स्वर्ण और 2014 में रजत पदक उनके नाम हैं। कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में भी वे 2016 और 2017 में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।
बजरंग पुनिया को कुश्ती के क्षेत्र में उनके असाधारण प्रदर्शन के लिए भारत सरकार ने 2015 में अर्जुन पुरस्कार, 2019 में पद्मश्री पुरस्कार, और 2019 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया था।
32 साल के बजरंग पुनिया ने आधिकारिक रूप से कुश्ती को अलविदा नहीं कहा है। नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने डोप टेस्ट के लिए सैंपल देने से मना करने पर बजरंग पूनिया को चार साल के लिए निलंबित किया है। यह प्रतिबंध 23 अप्रैल 2024 से शुरू होकर 22 अप्रैल 2028 तक प्रभावी है।
--आईएएनएस
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